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International Yoga Day 2018: ना तेरा, ना मेरा..योग है सबका..दुनिया का कोई भी धर्म ऐसा नहीं जिसका योग से जुड़ाव नहीं

International Yoga Day 2018, प्रत्येक धर्म में कही ना कहीं, किसी न किसी रूप में योग को मान्यता दी गई है।
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उदयपुर

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Madhulika Singh

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Updated: 19 Jun 2018, 5:49 PM IST

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International Yoga Day 2018: ना तेरा, ना मेरा..योग है सबका..दुनिया का कोई भी धर्म ऐसा नहीं जिसका योग से जुड़ाव नहीं

भुवनेश पंड्या/ उदयपुर. योग को लेकर कई लोगों में अब भी भ्रांतियां हैं, वे योग को एक धर्म के साथ जोडकऱ देखते हैं, जबकि दुनिया का कोई भी ऐसा धर्म नहीं है, जिसका योग से जुड़ाव नहीं हो। प्रत्येक धर्म में कही ना कहीं, किसी न किसी रूप में योग को मान्यता दी गई है। योग को जीवन की तमाम परेशानियों को दूर करने की रामबाण दवा है। हर व्यक्ति एवं धर्म ने योग की अपने-अपने हिसाब से व्याख्या की है। आइए जानते हैं कौन सा धर्म योग को किस रूप में देखता और समझता है।
हिन्दू धर्म
भगवद गीता में बड़े पैमाने पर विभिन्न तरीकों से योग शब्द का उपयोग करता है। एक पूरा अध्याय यथा छठा अध्याय पारंपरिक योग के अभ्यास को समर्पित है। इसमें योग के तीन प्रमुख प्रकार का परिचय मिलता है। कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग यहीं से उपजे हैं। मधुसूदन सरस्वती ने गीता को तीन वर्गों में विभाजित कर इसको विस्तार दिया। हठ योग एक विशेष प्रणाली है जिसे 15वीं सदी के भारत में हठ योग प्रदीपिका के संकलनकर्ता योगी स्वत्मरमा ने वर्णित किया था। हठयोग पतंजलि के राज योग से अलग है जो सत्कर्म पर केन्द्रित है। इसका बिन्दु भौतिक शरीर की शुद्धि ही मन की, प्राण की और विशिष्ट ऊर्जा की शुद्धि लाती है। पतंजलि राज योग के ध्यान आसन के बदले। यह पूरे शरीर के लोकप्रिय आसनों की चर्चा की।