
कोटड़ा. बुडिया क्षेत्र में सोमवार को हुई दुर्घटना में मौत के शिकार हुए भाई-बहन को घटना के 24 घंटे बाद भी अंतिम संस्कार नसीब नहीं हो पाया। मौत पर सौदेबाजी का खेल अब भी चल रहा है और भाई-बहनों के शव घर में ही पड़े अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं। आदिवासी अंचल में फैली मौताणा कुप्रथा का जहर अब भी समाज में गुला हुआ है। हादसे में मौत के बाद भाई-बहन के शव अब तक घर के आंगन में पड़े हैं।
मृतक के परिजन मुआवजा मांग रहे हैं। पीडि़त पक्ष और ट्रैक्टर मालिक पक्ष के बीच सौदेबाजी चल रही है। दोनों पक्षों की ओर से पंच नियुक्त किए गए, जिनके बीच मंगलवार देर शाम तक बातचीत का दौर चलता रहा, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। दोनों पक्षों के बीच की बातचीत एकांत जगह पर हो रही है। पुलिस की मौजूदगी में हो रही सौदेबाजी मंगलवार शाम तक नतीजे पर नहीं पहुंच पाई। उल्लेखनीय है कि सोमवार को हुई दुर्घटना में 17 वर्षीय सरली और उसके 8 वर्षीय भाई युवराज की मौत हुई थी। वे खुशी-खुशी मेला देखने के लिए निकले थे। दिनभर मेले में आनंद लेने के बाद शाम को घर लौटते समय हादसे के शिकार हुए। हादसे में 10 अन्य लोग घायल हो गए थे।
बीमा नहीं होना पड़ रहा भारी
जिस ट्रेक्टर से हादसा हुआ, उसका बीमा खत्म हो चुका था। ऐसे में मृतक के परिजनों को दोनों बच्चों की मौत के बाद किसी प्रकार का मुआवजा या बीमा राशि नहीं मिल पा रही है। इसी कारण मृतक के परिजनों ने जिम्मेदार वाहन बुडिया निवासी मालिक मोडिया पुत्र साजा पारगी को ही बताया है। उससे 40 लाख रुपए मुआवजा राशि की मांग कर दी।
स्थिति तनावपूर्ण
सूत्रों के अनुसार देर शाम मुआवजा राशि की मांग घटकर 25 लाख रुपए तक आ गई, फिर भी बात नहीं बनी। समझौता स्थल पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण है कि कभी भी विवाद बढ़ सकता है। मृतक पक्ष के गांव के अधिकांश लोग मृतक के घर पर ही मौजूद हैं। आरोप ये भी है कि मृतक के परिजनों ने ये आरोप भी लगाया कि दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर मालिक ने पुलिस को मृतक पक्ष के खिलाफ गलत सूचना दी। सूचना में मृतक पक्ष की ओर से दुर्घटना के बाद ट्रैक्टर मालिक और उसके परिवार पर हमला करने की बात कही गयी थी।
Published on:
11 Apr 2018 03:37 pm
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