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जननी सुरक्षा योजना: ‘बीमारी’ की नब्ज नहीं पकड़ पा रहे डॉक्टर, तकनीकी खामी में उलझा ऑनलाइन भुगतान

उदयपुर . अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर जनाना के ओहदेदार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब-तलब में जुट गए हैं।

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उदयपुर . राष्ट्रीय जननी सुरक्षा योजना (आरजीएसवाई) में प्रसूताओं के अटके भुगतान ने पन्नाधाय महिला चिकित्सालय (जनाना) एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के बीच विवादों की खाई खोद दी है। समस्या की ‘नब्ज’ टटोलकर प्रसूताओं को उनका भुगतान दिलाने के बजाय जनाना प्रशासन खुद की गलतियों पर पर्दा डालने में लगा है। इतना ही नहीं, अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर जनाना के ओहदेदार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से जवाब-तलब में जुट गए हैं।

सीएमएचओ को 24 फरवरी को जारी स्पष्टीकरण पत्र जनाना चिकित्सालय की गलती का ही नतीजा है। इसमें ऑनलाइन जननी शिशु पेमेंट मेथर्ड (ओजेएसपीएम) से प्रसूताओं को भुगतान नहीं हो पाने के कारणों पर मंथन के बजाय चिकित्सालय प्रशासन अभी कुल प्रसव के अनुपात में शेष रहे भुगतान की गणित में ही उलझा हुआ है। गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने गत 23 फरवरी को ‘जननी सुरक्षा योजना पर अनदेखी का ग्रहण’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर खामियों के सच को सामने लाने की पहल की थी।


सीएमएचओ की जिम्मेदारी
डाटा एंट्री के बाद अटके ऑनलाइन भुगतान का पीसीटीएस हमारे स्तर पर ट्रेस नहीं होता है। ऐसे में संबंधित भुगतान को प्रसूता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी चिकित्सा विभाग के सीएमएचओ और आरसीएचओ की बनती है।
डॉ. सुनीता माहेश्वरी, अधीक्षक, जनाना चिकित्सालय


विषय से भटके

संस्थागत प्रसव बढ़ाने के लिए केंद्रीय योजना के तहत प्रसूताओं को राजकीय संस्थानों में डिलीवरी के बदले में 14 सौ रुपए अतिरिक्त भुगतान होता है। सामान्य प्रक्रिया में प्रसूताओं की खाता डायरी की प्रति लेकर राजकीय संस्थान इसकी रिपोर्ट तैयार कर जयपुर स्थित मुख्यालय को सूचित करते हैं।

इसके बाद ओजेएसपीएम व्यवस्था के तहत भुगतान प्रसूताओं के खाते में पहुंचता है, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते कई बार यह भुगतान नहीं हो पाता है। ऐसे में विकल्प के तौर पर संबंधित संस्थान को अकाउंट पेयी चेक के माध्यम से यह भुगतान प्रसूता को देना होता है।

बाद में चेक के जरिये भुगतान की यूसी (यूटीलाइज सर्टिफिकिट) नोडल अधिकारी के तौर पर चिकित्सा विभाग को देनी होती है। जनाना चिकित्सालय कुल डिलीवरी 13060 बताकर सामान्य प्रक्रिया वाली 2449 प्रसूताओं को भुगतान देना शेष बता रहा है।

राष्ट्रीय योजना को लेकर किसी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। पिछली डीएचएस में अटके भुगतान की कमी पेशी दूर करने के लिए एडीएम की अध्यक्षता में आरसीएचओ को पाबंद किया था। मुझसे स्पष्टीकरण मांगने का कोई तुक नहीं है।
संजीव टाक, सीएमएचओ, चिकित्सा विभाग