
महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन 37वां सम्मान समारोह : मेधावी विद्यार्थियों सहित कई विभूतियां सम्मानित, video
राकेश शर्मा राजदीप/ प्रमोद सोनी .उदयपुर . सिटी पैलेस स्थित माणक चौक में महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन का 37वां वार्षिक सम्मान समर्पण समारोह रविवार को आयोजित हुआ।
इस खास मौके पर भामाशाह सम्मान 18 विद्यार्थियों को, महाराणा राजसिंह सम्मान 8 विद्यार्थियों को तथा महाराणा फतहसिंह सम्मान 80 विद्यार्थियों को दिया गया।
इसी क्रम में मुरैना की 10 वर्षीया अद्रिका और 14 वर्षीय भाई कार्तिक गोयल को जब सम्मान प्रदान किया गया, तब उपस्थित सभी अतिथियों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया। गौरतलब है कि दोनों भाई-बहन ने दंगों के दौरान छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में फंसे कई यात्रियों को भोजन-पानी सहित दवा और प्राथमिक चिकित्सा दिलवाने में भी मदद की।
इसके बाद सम्मान परम्परा के तहत राज्य के सर्वश्रेष्ठ पुलिस थाना मकबरा (कोटा) को उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘महाराणा मेवाड़ विशिष्ट सम्मान’ सहित हनुमानगढ़ के अन्तरराष्ट्रीय पैरा एथलेटिक संदीप सिंह मान को ’अरावली सम्मान’ तथा आदिवासी समाज उत्थान के लिए ‘राणा पूंजा सम्मान’ झाड़ोल के झालम चन्द अंगारी को आदिवासी परिवारों में शिक्षा एवं उन्नत कृषि के प्रति अलख जगाने के लिए प्रदान किया गया।
संगीत के क्षेत्र में ‘डागर घराना सम्मान’ ख्यात रूद्रवीणा वादक उस्ताद बहुद्दीन डागर को प्रदान किया गया। जबकि, ललित कला क्षेत्र में ‘महाराणा सज्जनसिंह सम्मान’ मोलेला (राजसमन्द) के मृण शिल्प कलाकार जमनालाल कुम्हार को प्रदान किया। भारतीय संस्कृति, साहित्य व इतिहास के क्षेत्र उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘महाराणा कुम्भा सम्मान’ डॉ. गिरीश नाथ माथुर एवं डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह ‘संजय’ को दिया गया।
राज्यस्तरीय अन्य अलंकरणों के तहत ज्योतिष, वेद विज्ञान एवं कर्मकाण्ड में श्रेष्ठ योगदान के लिये डॉ. हेमन्त कृष्ण मिश्र एवं डॉ. नरोत्तम पुजारी को ‘महर्षि हारीत राशि सम्मान’ तथा लखनऊ की मालिनी अवस्थी को अवध, बृज, बुंदेलखंड और भोजपुर की लोककला के संरक्षण के लिए ‘महाराणा मेवाड़ सम्मान’ मिला।
इसी तरह, त्रिपुरा के सपन देबवर्मा और उनकी 9 वर्षीय पुत्री सुमा देबवर्मा को जून 2018 में त्रिपुरा में हुई भयंकर वर्षा के कारण रेलवे ट्रेक के नीचे मिट्टी कटाव के बाद हजारों रेल यात्रियों की जान बचाने के लिए ‘पन्नाधाय अलंकरण’ प्रदान दिया गया।
पर्यावरण संरक्षण-संवद्र्धन के क्षेत्र में की गई स्थाई मूल्य की सेवाओं के लिए ‘महाराणा उदयसिंह अलंकरण’ इस वर्ष नई दिल्ली की गीता शेषमणि व कार्तिक सत्यनारायण को प्रदान किया। वहीं, ख्यात पाŸवगायक सुरेश वाडकर को भारत की प्रमुखता से बोली जाने वाली 17 से अधिक भाषाओं में गीत गाकर देश को एक सूत्र में पिरोने के लिए ‘हकीम खां सूर अलंकरण’ प्रदान किया गया। इसके अलावा, स्वतंत्र व खोजी पत्रकार तथा लेखिका स्वाति चतुर्वेदी को ‘हल्दीघाटी अलंकरण’ पत्रकारिता के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए दिया।
अन्तरराष्ट्रीय अवॉर्ड डॉ. क्रैडाक को
अरावली पहाडिय़ों से चांदी व जस्ते की प्रारंभिक उत्पादन सहित मेवाड़ महाराणाओं के समय जावर खदानों में जस्ता गलाने वाली भट्टियों की प्रक्रिया को विश्वस्तर पर सम्मान दिलाने के लिए अन्तरराष्ट्रीय ‘कर्नल जेम्स टॉड अलंकरण’ डॉ. पॉल टी. क्रैडॉक को प्रदान किया गया।
इस अवसर पर गायक सुरेश वाडेकर ने अतिथियों की फरमाइश पर ‘ऐ-जिंदगी गले लगा ले..’ और ‘मेघा रे मेघा रे..’ जैसे गीत सुनाए। इस दौरान समारोह अध्यक्ष डॉ. कस्तूरी रंगन, महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन अध्यक्ष व प्रबंध न्यासी अरविंदसिंह मेवाड़ व न्यासी लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ सहित कई गणमान्य मौजूद थे।
Updated on:
11 Mar 2019 04:18 pm
Published on:
11 Mar 2019 03:10 pm
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