
उदयपुर . मकर संक्रांति पर्व पर मेवाड़ में दान-पुण्य के साथ ही पारंपरिक खेल खेलने की परंपरा निर्वाह होगा। संक्राति को लेकर घरों और बाजारों में इसकी तैयारियां शुरू गई हैं। इस अवसर पर सितोलिया, मारदड़ी, पतंगबाजी आदि के आयोजन होंगे। मकर संक्रांति पर खेले जाने वाले पारंपरिक खेलों को लेकर युवाओं एवं बच्चों में उत्साह है, वहीं बाजारों में व्यवसायियों ने गेंदों एवं पतंगों की दुकानें सजानी शुरू कर दी है। इनके विभिन्न रंग और विशेषताओं वाली पतंगें बच्चों और युवाओं को आकर्षित कर रही हैं। हालांकि मेवाड़ में मकर संक्रांति के बजाय निर्जला एकादशी पर पतंग उड़ाने की परंपरा रही है, लेकिन गत कुछ वर्षों से अब संक्रांति पर भी पतंगें उडऩे लगी हैं। विक्रेता विवेक शर्मा ने बताया कि शहर में गर्मियों की छुट्टियों में पतंगें ज्यादा बिकती है, लेकिन गत चार-पांच वर्षों से संक्रांति पर भी पतंगें उडऩे लगी है। इस पर्व पर भी पतंगों की मांग बढऩे लगी है। शर्मा का कहना है कि संक्रांति पर इस बार विशेष तरह की पंतगें मंगवाई हैं जिसमें बच्चों की पहली पसंद कार्टून वाली डोरेमोन, मोटू -पतलू, स्पाइडर मैन, बाहुबली, बाहुबली-2 पतंगें है। पतंगों की कीमत 2 से 50 रुपए तक की पतंगें बिक रही है। दुकानदारों ने बताया कि धागे में बरेली का धागा ज्यादा बिक रहा है। सादा धागे का गिटटा भी बिक रहा है। दूसरी ओर, मकर संक्रांति पर घरों में जहां तिल के विविध व्यंजन के साथ ही खींच बनाया जाएगा। इसके चलते बाजार में तिल, गुड़ आदि की खूब बिक्री हो रही है।
खत्म होगा खरमास
ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि मकर संक्रांति के आने का मतलब खरमास समाप्त होना भी है। सूर्यदेव के दक्षिणायन से उत्तरायण आने के बाद से खरमास खत्म होगा। खरमास में कोई भी मांगलिक काम नहीं होते हैं। खरमास खत्म होते ही तमाम शुभ काम का योग शुरू हो जाता है। विवाह के योग भी बनते हैं।
Updated on:
13 Jan 2019 07:09 pm
Published on:
13 Jan 2019 06:47 pm
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