
मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. नगर निगम उदयपुर (NAGAR NIGAM UDAIPUR) की शुक्रवार को हुई साधारण सभा की बैठक में सदस्यों ने कहा कि उदयपुर शहर पर जयपुर को आधार मानकर बनाए गए नियम वाटिकाओं के लिए ठीक नहीं है। ये नियम उदयपुर की भौगोलिक स्थिति को लेकर कतई ठीक नहीं है, इस पर सरकार फिर से विचार कर वाटिकाओं के लिए तय नियमों में राहत दे। बैठक में वाटिका संचालन के लिए सडक़ सीमा के नियमों के मुद्दे पर चर्चा हुई। पार्षद सिद्धार्थ शर्मा, ओम प्रकाश चित्तौड़ा, पारस सिंघवी, जगत नागदा, नजमा मेवाफरोश ने अपनी बात रखी। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने तर्क दिया कि नियमों को लेकर कहा कि जयपुर की आबादी और उदयपुर की आधी में बहुत फर्क है ऐसे में नियम भी उसी अनुसार होने चाहिए, उन्होंने कहा कि वाटिकाओं में पार्किंग के प्रबंध जरूर हो, अवैध वाटिकाएं चलाने वालों से हमे पैसा भी नहीं मिल रहा और वे मजे भी कर रहे है। पार्षद नजमा ने कहा कि वार्ड 4 में नजरबाग रेस्टोरेंट के नाम से लाइसेंस दे रखा है जबकि वहां मांगलिक आयोजन हो रहे है।
उदयपुर नगर निगम के 4 बड़े फैसले
1. धूलकोट का धूलकोट ही : बैठक में निर्णय किया कि धूलकोट चौराहा का नाम बदलकर पीपा चौराहा रखा गया जिसे निरस्त कर उसे धूलकोट ही रखा जाएगा। पीपा समाज से चर्चा कर किसी अन्य स्थान का नाम पीपाजी के नाम करेंगे।
2. वाल्मीकि समाज के सामुहिक विवाह में राशि : बोर्ड ने तय किया कि वाल्मीकी समाज के पंजीकृत संस्था से कम से कम दस जोड़ों के सामूहिक विवाह होने पर निगम प्रति जोड़ा 11 हजार रुपए राशि अपनी तरफ से देगा।
3. हाथीपोल थाने के हैरिटेज का संरक्षण होगा : हाथीपोल थाने के बाहर की इमारत जो ऐतिहासिक हैरिटेज है उसको सुरक्षित रखते हुए उसका जीर्णोद्वार किया जाए। इसके लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
4. भट्ट जी की बाड़ी से अंडरपास : भट्ट जी की बाड़ी से बंशी पान की तरफ एक अंडरपास बनाने का प्रस्ताव भी सदस्य केसर सिंह ने रखा ताकि इस रोड से रेजीडेंसी की छात्राएं और रजिस्ट्री कराने वाले आसानी से निकल सके, मेयर ने सर्वे की बात कही।