
चिकित्सा विभाग की उदासीनता ने बिगाड़ा सब सेंटर्स का 'स्वास्थ्य
उदयपुर/ पारसोला (पस). medical department जनजातियों के स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सा विभाग की अनदेखी झोलाछाप डॉक्टर्स की बिरादरी को बढ़ावा दे रही है। चिकित्सक और नर्सिंग कार्मिकों की कमी के बीच जनजाति परिवार तत्काल उपचार सुविधा के नाम पर नीम-हकीमों की शरण में जा रहे हैं। सरकार के दावों के ठीक उलट ग्रामीण स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है। दूसरी ओर चिकित्सा विभाग के पास भवनों एवं सुविधाओं के बावजूद चिकित्सक नहीं हैं। स्थिति में सुधार की बजाए बीमारी बढ़ रही है। अब ताक विभागीय जिम्मेदार ग्रामीणों के प्राथमिक उपचार के लिए नर्सिंग स्टाफ भी नहीं जुटा पा रहा है। इसका ही नतीजा है कि बीते एक साल से अणत, लिंबरवाड़ा, मूंगाणा, नाड़, शकरकंद, खूंता और सेवानगर सब सेंटर्स क्षेत्र में बड़ी आबादी का स्वास्थ्य केवल एक एएनएम के भरोसे है। इसमें भी अणत, सेवानगर और लिंबरवाड़ा सब सेंटर्स का तो बीते एक साल से ताला ही नहीं खुला है।
भवन में खर्चे 23 लाख
ग्राम पंचायत अणत सरपंच कुलदीप मीणा की मानें तो वर्ष 2015-16 में करीब 23 लाख की लागत से लिम्बरवाड़ा में आधुनिक सुविधायुक्त सबसेन्टर बनाया गया था, जो कि एक साल से बंद है। दुर्भाग्यवश भवन के समीप अब झाडिय़ों ने घर कर लिया है। अणत एंव चरपोटिया ग्राम पंचायत की करीब पांच हजार की आबादी प्राथमिक उपचार को तरस रही है। पंचायत समिति की साधारण सभा में कई बार मुद्दा उठा। विभागीय ओहदेदारों को भी अवगत कराया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।
63 फीसदी पद रिक्त
पूरे धरियावद उपखण्ड की स्थिति पर गौर करें तो चिंताजनक हालात सामने आते हैं। यहां आबादी के अनुरूप स्वीकृत 82 नर्सिंग पदों के एवज में 52 पद रिक्त हैं। कुल 53 स्वास्थ्य केंद्र में शामिल 19 सबसेंटर, तीन पीएचसी और दो सीएचसी में प्रसाविका पदों की अनुपस्थिति चिंताएं बढ़ा रही है। चिकित्सकों की स्थिति भी गंभीर है। स्वीकृत 15 के जवाब में 6 पद रिक्त हैं। सीएचसी प्रभारी जीवराज मीणा ने बताया कि उनके यहां दो एएनएम सेवारत थी, जिसमें से एक का हाल ही में तबादला हो गया। medical department एक एएनएम के भरोसे सीएचसी संचालन परेशानी खड़ी कर रहा है।
Published on:
13 Oct 2019 06:00 am
