26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उदयपुर की सुमन बिछड़ गई थी परिवार से, 6 साल बाद वापस मिला परिवार, आखिर कैसे हुआ ये मिलन..पढ़ें सुमन की पूरी कहानी

बेटी को सलामत देख रो पड़े सरपंच व पिता, बेटी ने भी पहचाना

2 min read
Google source verification
suman

मो. इलियास/ उदयपुर. विमंदित सुमन उर्फ चम्पा (38) छह साल पहले परिजनों व अपने गांव खजूरिया, छोटा उदयपुर (गुजरात) से बिछड़ गई। इधर-उधर भटकते हुए जैसे-तैसे वह नारी निकेतन पहुंच गई लेकिन वह कुछ भी नहीं बता पाई। इस दौरान उसके मुंह से समय-समय पर निकले आधे-अधूरे शब्दों को जोड़ते हुए नारी निकेतन अधीक्षक ने उसके गांव का नाम पहचान लिया।


नारी निकेतन अधीक्षक वीना मीरचंदानी व संभाग स्तरीय कमेटी की अध्यक्ष पिंकी मांडावत ने दस्तावेज जांच के बाद सरपंच व पिता रमन रठवा को उनकी बेटी सुपुर्द की। सुमन को एकाएक सामने देख वे बिलख पड़े और बेटी ने भी पिता को पहचान लिया। नारी निकेतन ने पिछले वर्षों में महिला का एमबी चिकित्सालय में इलाज करवाया, जिससे वह अब काफी सामान्य हो गई।

READ MORE: पीएम मोदी की पत्नी जशोदा बेन ने उदयपुर में बेटियों को दी ये सीख, कहा.. पढ़ाई पूरी कीजिएगा..


रतनगढ़ चूरू पहुंची, बीकानेर भी रही
सुमन मार्च 2011 में खजूरिया से भटकते-भटकते रतनगढ़ चूरू पहुंच गई। लावारिस घूमने पर लोगों ने उसे पुलिस थाने पहुंचाया। बाद में न्यायालय ने उसे बीकानेर स्थित नारी निकेतन भेज दिया। अगस्त 2०14 तक वह वहीं रही, परिजनों की तलाश के लिए पूरे राज्य में फोटो भी प्रसारित किए गए लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। उसके मुंह से सिर्फ उदयपुर निकलने से वहां के स्टाफ ने इसे उदयपुर जानकार यहां नारी निकेतन भिजवा दिया।

READ MORE: उमेश के जैसा ही जीवा का भी हाल...12 साल से बंधा है पेड़़ से, क्‍या इसे भी मिलेगा सहारा


जोड़ते गए हर शब्द को
उदयपुर में सुमन गुमसुम रहती थी। दो साल तक एमबी चिकित्सालय में उसका उपचार चला। सामान्य होने पर वह टूटे-फूटे शब्द बोलने लगी। अधीक्षक ने स्टाफ व वहां रहने वाली अन्य महिलाओं को हर नए शब्द को लिखने के लिए कहा। शब्दों को जोड़ते हुए खजूरी गांव का नाम सामने आया। यह गांव उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व राजसमंद के रेलमगरा में भी होने से संबंधित थाने को सूचना भिजवाई गई। उसके वर्तमान व पुराने फोटो भेजे गए लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। धीरे-धीरे छोटा उदयपुर नाम सामने आने पर अधीक्षक ने गूगल पर सर्च किया तो वह गुजरात में निकला। वहां पुलिस कंट्रोल रूम से पूछताछ की तो खजूरिया गांव का नाम निकल आया। सरपंच ने फोटो देखकर सुमन को पहचान लिया। वह स्वयं परिजनों के साथ उदयपुर पहुंचे।

बड़ी खबरें

View All

उदयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग