
हर साल कॉपियों पर होते हैं दो करोड़ खर्च... इसके बावजूद बिना कॉपी जांचे ही नम्बर दे रहे है परीक्षक
चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर. मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणामों में गड़बडिय़ों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। वर्ष 2018 में 2 लाख 11 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, लेकिन कॉपियों की जांच में लापरवाही के चलते कई विद्यार्थियों के परिणामों में गड़बडिय़ां उजागर हुई है। इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
विश्वविद्यालय प्रति वर्ष कॉपियों की जांच पर करीब दो करोड़ रुपए खर्च करता है, इसके बावजूद परीक्षक बिना कॉपी जांचे ही नम्बर दे रहे हैं जिससे न केवल विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है, वरन विद्यालय की साख पर आंच आ रही है। सूचना का अधिकार कानून के तहत मिली कई ऐसी कॉपियां सामने आई है जिनको खोलकर देखा तक नहीं गया और मुख पृष्ठ पर नम्बर दे दिए। परिणामों से असंतुष्ट छात्र पुनर्मूल्यांकन करवाने को मजबूर है जिससे विश्वविद्यालय के खजाने में धन बरस रहा है।
ऐसे हैं बुरे हाल
बीकॉम द्वितीय वर्ष के छात्र ललित चंदेरिया ने आशानुरूप अंक नहीं आने पर आरटीआई के तहत कॉपियां मांगी तो उसे केवल चार पेपर की कॉपी ही उपलब्ध करवाई गई जबकि कम्पनी लॉ की कॉपी तो अब तक रिकार्ड में मिल ही नहीं रही है। इनकम टेक्स सब्जेक्ट की कॉपी के मुख्य पृष्ठ पर तो बिना जांचे ही नम्बर दे दिए गए, वहीं कॉरर्पोरेट अकाउंटिग की कॉपी तो आधी ही जांची गई। इसी तरह मनी एंड फाइनेंस की कॉपी में जांचकर्ता ने खुद जो नम्बर दिए उनकी जोड़ तक गलत है। मुख पृष्ठ पर 41 एवं कॉपी में सही जवाब पर दिए अंकों की जोड़ 53 है। आरटीआई में निकलवाई कॉपियों की बाहरी एक्सपर्ट से जांच करवाने पर 15 से 20 नम्बरों का फ र्क आया।
फि र क्यों हो रही खानापूर्ति
गोपनीय शाखा के अनुभाग अधिकारी मांगीलाल के अनुसार प्रोफेसर जिनको 5 वर्ष से अधिक का अनुभव हो, उनको उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए भेजी जाती है। वर्ष 2018 में 2 लाख 11 हजार छात्रों ने वार्षिक एवं करीब 8 से 9 हजार छात्रों ने सेमेस्टर पद्धति से परीक्षा दी थी।
ऐसे समझे खर्च का गणित
स्नातक कक्षाओं के 1 लाख 30 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी यानी चार प्रश्नपत्रों की करीब 5.20 लाख कॉपियों को जांचने के लिए 20 रुपए प्रति कॉपी के हिसाब से जांचकर्ता को दिए गए। ऐसे मे विवि ने एक करोड़ 4 लाख रुपए का भुगतान किया। स्नातकोत्तर छात्र 81 हजार ने परीक्षा दी। चार उत्तर पुस्तिकाएं जांचने के लिए 25 रुपए प्रति कॉपी के हिसाब से जांचकर्ता को 81 लाख रुपए दिए।
Updated on:
06 Jul 2018 07:38 pm
Published on:
06 Jul 2018 07:29 pm
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