
उदयपुर . कोटा और सीकर जिले शिक्षा क्षेत्र में पूरे प्रदेश में अग्रणी है, लेकिन दोनों जिलों में एक भी मॉडल स्कूल नहीं है। यही नहीं प्रदेश के चार जिले और है, जहां एक भी मॉडल स्कूल नहीं। माध्यमिक स्तर की बेहतर शिक्षा के लिए मॉडल स्कूलों की शुरुआत की गई थी, लेकिन अभी तक राज्य के ये छह जिले एेसी स्कूली पढ़ाई से दूर हैं।
यह रहा उद्देश्य
वैश्वीकरण के इस दौर में वैज्ञानिक एवं तकनीकी संसार में भी आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं। शिक्षा क्षेत्र में 14 से 18 वर्ष आयुवर्ग के बच्चों को बेहतर माध्यमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र सरकार ने शैक्षणिक दृष्टि से पिछडे़ ब्लॉक्स में केन्द्रीय विद्यालयों की तर्ज पर ये मॉडल स्कूल खोले थे। इन स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, शैक्षणिक वातावरण, छात्र-शिक्षक अनुपात, आधुनिकतम सूचना व संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग हो।
ब्लॉक स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाली माध्यमिक शिक्षा सुलभ करवाना ताकि देश के प्रत्येक पिछड़े ब्लॉक में कम से कम एक स्कूल ऐसा उपलब्ध हो जो उक्त ब्लॉक में अन्य स्कूलों के लिए आदर्श स्थापित कर सके। विद्यार्थियों का चहुंमुखी व्यक्तित्व विकास करना प्रमुख लक्ष्य होगा।
हर तबके को पूरा मौका
स्वामी विवेकानन्द राजकीय मॉडल स्कूल में मुहैया करवाई जाने वाली शिक्षा सम्पूर्ण और समग्र है। इसमें शारीरिक, भावनात्मक व कलात्मक विकास भी शामिल हैं। स्कूलों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के बालक- बालिकाओं, विधवा व परित्यक्ता की संतानों एवं विकलांगों को प्रवेश में विशेष प्राथमिकता मिलती है।
गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व कम्प्यूटर की पढ़ाई पर विशेष ध्यान।
विद्यार्थियों में नेतृत्व के गुण, सहयोग की भावना, भागीदारी योग्यताएं, वास्तविक जीवन की परिस्थिति से जूझने के लिए सुलभ कौशल और योग्यता विकास करना।
Published on:
06 Jan 2018 03:50 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
