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Motivational: 7 बार असफल होने के बाद बने एयरफोर्स ऑफिसर, पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए डिलीवरी बॉय का भी किया काम

Vishal Soni Of Shahpura: विशाल सोनी ने सीमित साधनों और सात बार असफल होने के बावजूद अपने सपने को सच कर दिखाया। आर्थिक तंगी में अखबार बांटने और डिलीवरी बॉय का काम भी किया।

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फोटो: पत्रिका

Air Force Officer Success Story: सपने नींद में नहीं, जागती आंखों में पलते हैं और तब तक चैन नहीं लेने देते, जब तक मंजिल कदमों में न आ जाए। शाहपुरा (भीलवाड़ा) के विशाल सोनी की कहानी एक प्रेरणा है, जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की जिद को दर्शाती है। यह कहानी केवल एक चयन की नहीं, बल्कि उस जिद की है, जिसने अखबार बांटने वाले और डिलीवरी बॉय को एयरफोर्स अफसर बना दिया।

विशाल का परिवार सामान्य था। पिता सुरेश सोनी का इलेक्ट्रिकल पार्ट्स सप्लाई का व्यवसाय कोविड के बाद ठप हो गया। इसके बावजूद, माता-पिता ने बच्चों की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी। 2014 में परिवार ने शाहपुरा छोड़कर उदयपुर में बसने का निर्णय लिया।

पिता की आय कम हो गई, तो मां मीनाक्षी ने नौकरी की और परिवार का सहारा बनीं। विशाल ने बारहवीं के बाद मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और साथ ही एनसीसी जॉइन की। आर्थिक तंगी के बावजूद, उसने अखबार बांटना और डिलीवरी बॉय का काम किया। यही संघर्ष उसे एयरफोर्स अफसर बनने तक ले गया।

कमियां पहचानी, खुद को तराशा

विशाल का लक्ष्य एकदम साफ था सशस्त्र बलों में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना। इसके लिए उसने सीडीएस और एएफकैट (एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट) की परीक्षाएं दीं। सात बार असफलता मिली। हर असफलता के बाद निराशा जरूर आई, लेकिन हार नहीं मानी।

अपनी कमियों को पहचाना, तैयारी की रणनीति बदली और पूरे आत्मविश्वास के साथ फिर जुट गए। अंततः निरंतर मेहनत रंग लाई। विशाल का चयन एयरफोर्स ऑफिसर के रूप में हुआ है। वे 28 दिसंबर से एयरफोर्स अकादमी हैदराबाद में प्रशिक्षण शुरू करेंगे।


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