
- मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय - आईक्यूएसी की बैठक में नहीं हो पाया पदोन्नति पर निर्णय
उदयपुर. मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय का कुलपति बनने के लिए मौजूदा कुलपति प्रो. जेपी शर्मा समेत 270 से ज्यादा प्रोफेसर कतार में है। शर्मा का कार्यकाल दिसम्बर में पूरा हो रहा है। ऐसे में राजभवन की ओर से गठित सर्च कमेटी ने कुलपति पद पर चयन प्रक्रिया शुरू करते हुए 14 अक्टूबर तक आवेदन मांगे थे। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय और राजभवन के पोर्टल पर बम्पर आवेदन मिले। इनमें जेपी शर्मा ने भी दोबारा आवेदन किया है और पूरी जोड़तोड़ में लगे हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन अब तमाम आवेदन सर्च कमेटी को जयपुर भेजने की तैयारी में जुटा हुआ है।
कुलपति के कमबेक से दूसरे टेंशन में
तत्कालीन राज्यपाल कल्याणसिंह ने राजस्थान विवि के प्रो बीएम शर्मा की अध्यक्षता में सर्च कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने नए कुलपति के लिए आवेदन मांगे थे। इस बीच मौजूदा कुलपति शर्मा को तत्कालीन रजिस्ट्रार हिम्मतसिंह भाटी के बीच विवादों में रहने पर छुट्टियों पर जाना पड़ा था और चर्चा शुरू हो गई कि अब विदाई हो गई है लेकिन बाद में कलराज मिश्र के राज्यपाल बनते ही शर्मा फिर से आश्चर्यजनक रूप से सीट पर आ गए। अब शर्मा ने दोबारा कुलपति बनने के लिए आवेदन भी कर दिया, जिससे चर्चाओं का बाजार गर्म है कि राज्यपाल से शर्मा की नजदीकी का फायदा उन्हें मिल सकता है और सरकार वॉकओवर भी दे सकती है।
दौड़ में व्यास और लोढा भी आगे..
कुलपति बनने के लिए राजभवन के अलावा विश्वविद्यालय की मेल पर 270 से ज्यादा आवेदन आए, जबकि कई हार्ड कॉपी में भी आवेदन मिले हैं। कुलपति की दौड़ में प्रो. पीआर व्यास, प्रो संजय लोढ़ा, प्रो. बीएल आहुजा, प्रो. दरियावसिंह चुण्डावत, प्रो. साधना कोठारी मजबूत नजर आ रहे हैं। इसमें व्यास और लोढ़ा मुख्यमंत्री गहलोत एवं सीपी जोशी गुट के माने जाते हैं, जबकि चुण्डावत, आहुजा, लोढ़ा और कोठारी भी राजनीतिक गठजोड़ बिठा रहे हैं, लेकिन इनको योग्यता संबंधित तकनीकी मुश्किल आ सकती है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा कुलपति प्रो शर्मा ने राजभवन को जो पत्र भेजा था, इसमें पात्रता तिथि से प्रोफे सर का अनुभव दिए जाने को नियम विरुद्ध बताया।
खेमेबाजी से बढ़ेगा टकराव...
कुलपति के लिए आवेदन करने वाले प्रोफेसर्स काफी पहले से राजनीतिक खेमेबाजी में लगे हुए हैं। विवादों में रहे मौजूदा कुलपति के खिलाफ कांग्रेस के स्थानीय विधायक भी नाराज दिखे और सरकार को फीडबेक दिया। आवेदन करने वाले सरकार में मौजूद दिग्गज नेताओं के खेमों से है। ऐसे में अपने विश्वस्त को कुलपति बनाने के लिए पैनल में उनका नाम शामिल हो और उसके बाद राज्यपाल से तालमेल बैठ जाए यह स्थिति टकराव जैसी हो सकती है।
Published on:
19 Oct 2019 01:22 pm
