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राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू पूरी दुनिया में अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, वादियों और नक्की झील के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के साए में एक ऐसा गांव भी मौजूद है, जो आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी आधुनिक युग की सबसे बड़ी जरूरत यानी बिजली की नियमित रोशनी से पूरी तरह महरूम था। अरावली की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर से मात्र 6 किलोमीटर दूर बसे उत्तरज गांव में अब जाकर अंधकार युग का अंत होने जा रहा है, जिससे पूरे अंचल के ग्रामीणों में बेहद खुशी और उल्लास की लहर दौड़ गई है।
उत्तरज गांव के लोगों ने अपनी इस बुनियादी समस्या का समाधान करने के लिए सरकारी तंत्र के भरोसे बैठने के बजाय जो सामूहिक हौसला और मेहनत दिखाई है, उसने पूरे राजस्थान के सामने एक बहुत बड़ी मिसाल कायम की है। बिजली विभाग द्वारा बुनियादी ढांचा खड़ा करने की तकनीकी कोशिशों के बीच जब सबसे बड़ी बाधा भारी-भरकम बिजली की डीपी (ट्रांसफार्मर) को पहाड़ी के ऊपर गांव तक पहुंचाने की आई, तो गांव के युवाओं और बुजुर्गों ने खुद कमान संभाल ली।
उत्तरज गांव तक पहुंचने का सफर किसी भी आम गाड़ी या मशीनरी के लिए बेहद कठिन और खतरनाक माना जाता है। चारों तरफ फैले विशालकाय पत्थर, संकरे पहाड़ी मोड़ और उबड़-खाबड़ चढ़ाई के कारण यहां तक भारी वाहन ले जाना बिजली विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
ऐसे में गांव के हीर सिंह और नरपत सिंह सहित करीब 2 दर्जन से अधिक स्थानीय ग्रामीणों ने एक सामूहिक बैठक की और तय किया कि वे खुद इस कार्य को अंजाम देंगे। ग्रामीणों ने अपनी शारीरिक क्षमता और अटूट हौसले के दम पर बिजली की भारी-भरकम डीपी को मजबूत बल्लियों और रस्सियों के सहारे अपने कंधों पर उठा लिया। कई घंटों की हाड़-तोड़ मेहनत, पसीने से तर-बतर बदन और पत्थरों पर फिसलते कदमों के बावजूद इन ग्रामीणों ने बिना रुके इस बेहद कठिन और जोखिम भरे सफर को पूरा किया और डीपी को सुरक्षित रूप से गांव के चिन्हित स्थान तक पहुंचाकर ही दम लिया।
मकानों के पास जैसे ही बिजली का ट्रांसफार्मर पहुंचा, पूरे उत्तरज गांव के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के चेहरे खुशी से खिल उठे। ग्रामीणों ने पारंपरिक लोकगीतों और ढोल-नगाड़ों के साथ इस पल का स्वागत किया, क्योंकि उनके लिए यह किसी बहुत बड़े उत्सव से कम नहीं था।
गांव के प्रबुद्ध नागरिक सोहन सिंह और सांकल सिंह ने भावुक होते हुए मीडिया को बताया, "हमने और हमारे पूर्वजों ने पूरी जिंदगी ढिबरी, लालटेन और अंधेरे के साए में गुजार दी। गुरु शिखर पर आने वाले लाखों पर्यटक रोशनी से नहाए रहते हैं, लेकिन हमारे बच्चे रात को ठीक से पढ़ भी नहीं पाते थे। मोबाइल चार्ज करने के लिए भी हमें कई किलोमीटर नीचे जाना पड़ता था। आज इस डीपी के गांव में पहुंचने से हमें यह पक्का भरोसा हो गया है कि लंबे समय से बनी बिजली की आंख-मिचौली और अंधेरे से हमारे इस पूरे अंचल को हमेशा के लिए राहत मिल जाएगी। हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य अब पूरी तरह उजाले में बीतेगा।"
भौगोलिक और तकनीकी दृष्टि से देखा जाए तो माउंट आबू के इस हिस्से में बिजली के तार और ट्रांसफार्मर पहुंचाना कोई सामान्य काम नहीं था। इसके पीछे 3 मुख्य प्राकृतिक और नीतिगत कारण हमेशा से हावी रहे हैं।
अरावली की खड़ी चढ़ाई: गुरु शिखर के समानांतर स्थित उत्तरज गांव की ऊंचाई और वहां जाने वाले रास्ते पूरी तरह से कच्चे और खड़ी चढ़ाई वाले हैं, जहां मशीनी क्रेन या हाइड्रा ले जाना तकनीकी रूप से पूरी तरह असंभव था।
वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के कड़े नियम: यह पूरा इलाका माउंट आबू के संरक्षित वन क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) के अंतर्गत आता है, जिसके कारण यहां सड़कों के निर्माण और पेड़ों की कटाई पर पर्यावरण मंत्रालय के बेहद कड़े कानूनी प्रतिबंध लागू हैं।
भारी पत्थरों का प्राकृतिक अवरोध: रास्ते में अरावली के प्राचीन और विशालकाय ग्रेनाइट पत्थर मौजूद हैं, जिन्हें बिना ब्लास्टिंग के हटाना मुमकिन नहीं था, और अभयारण्य क्षेत्र होने के कारण विस्फोटों की अनुमति प्रशासन द्वारा नहीं दी जा सकती थी।
ग्रामीणों द्वारा कंधों पर डीपी उठाकर गांव तक पहुंचाने के इस अदम्य साहस और श्रमदान की गूंज जब अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) के आला अधिकारियों और स्थानीय उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) तक पहुंची, तो वे भी इन पहाड़ी लोगों के जज्बे के कायल हो गए।
बिजली विभाग के स्थानीय सहायक अभियंता (AEN) ने बताया, "उत्तरज गांव के विद्युतीकरण का कार्य हमारी प्राथमिकताओं में शामिल था, लेकिन लॉजिस्टिक्स और भारी ट्रांसफार्मर को साइट पर पहुंचाना हमारे ठेकेदारों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर हमारी सबसे बड़ी समस्या को चुटकियों में हल कर दिया है। अब हमारे तकनीकी कर्मचारी और लाइनमैन बिना किसी देरी के खंभों पर तार खींचने और मीटर लगाने के काम को रिकॉर्ड समय में पूरा करेंगे, ताकि 15 जून के बाद किसी भी शुभ दिन इस गांव को पूरी तरह से ग्रिड से जोड़कर पहली बार लाइव बिजली सप्लाई चालू की जा सके।"
Published on:
18 Jun 2026 08:52 am
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