
उदयपुर . मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार ने एड़ी से चोटी का जोर लगा रखा है मगर इसकी सफलता के दावे करने वाले अधिकारियों के पास इसके ठोस प्रमाण नहीं है। न ही किसी भी एजेंसी का कोई तकनीकी सर्वे उनके पास मौजूद नहीं है। गोगुन्दा की मजावद पंचायत समिति में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के कार्यों का निरीक्षण करने पहुंची पत्रिका टीम ने जब अभियान से जुड़े अधिकारियों से पूछा कि इसका ग्रामीणों को क्या फायदा मिला है तो उनका जवाब था कि गांव का जलस्तर बढ़ गया है। किस गांव में कितना जलस्तर बढ़ा, इस प्रश्न का उनके पास कोई जवाब नहीं था। उन्होंने कहा कि कहीं एक फीट तो कहीं डेढ़ फीट जल स्तर ऊंचा आया है।
किसी एजेंसी ने नहीं किया सर्वे
अभियान के कार्य जहां-जहां किए गए हैं, वहां जल स्तर कितना बढ़ा है, इसके बारे में भूजल विभाग अथवा किसी भी ऐसी विश्वसनीय एजेंसी ने अभी तक कोई सर्वे रिपोर्ट जारी नहीं की है। ऐसे में अधिकारियों के दावे कितने विश्वसनीय है, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
ऐसा होना चाहिए
पिछली गर्मियों में गांवों के कुओं में पानी का जलस्तर क्या था, उसकी तुलना आने वाली गर्मियों में पानी का जलस्तर मापकर होगी। कुछ समय पहले ही वर्षा का दौर खत्म हुआ है। ऐसे में गोगुन्दा के पहाड़ी क्षेत्रों में एनीकट व नाडिय़ों में भरा पानी दिखाकर अधिकारी दावे कर रहे हैं कि जलस्तर कम से कम डेढ़-दो फीट बढ़ गया। मगर गर्मियों में ही पता चलेगा कि जहां पानी नहीं था, वहां कितना पानी रुका है। जलस्तर कितना बढ़ा है अथवा बढ़ा ही नहीं।
Published on:
30 Oct 2017 02:47 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
