
हे भगवान! ये कैसी मानवता... मां गंभीर हालत मानकर मृृृत बच्ची को अस्पताल के गेट पर लेकर 8 घंटे बिलखती रही..
मो. इलियास/ उदयपुर. चिकित्सकों व अस्पताल के कार्मिकों को भले ही लोग ‘भगवान’ माने लेकिन बाल चिकित्सालय में गुरुवार तडक़े एक मासूम की मौत के बाद उसकी मां के साथ चिकित्सक व स्टाफ ने जो बर्ताव किया, उसने इस धारणा की धज्जियां उठा दी। चिकित्सकों व स्टाफ ने घोर लापरवाही बरते हुए न तो मां को उसकी बच्ची की मौत सूचना दी और न ही पुलिस व परिजनों के आने तक इंतजार किया। बेसुध मां अपनी मृत बच्ची के नाक में लगी नली के कारण उसे गम्भीर मानते हुए अस्पताल के गेट बाहर 8 घंटे तक बैठकर बिलखती रही। मानवता को शर्मसार करने वाले इस कृत्य की सूचना पर संस्था के कार्यकर्ता व पत्रिका टीम के पहुंची तो चिकित्सकों ने दोपहर 12 बजे बच्ची का चेकअप कर मृत घोषित किया। लिखित में देने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया।
मामले में चिकित्सकों का कहना है कि बच्ची की हालत गंभीर थी। मां के साथ कोई नहीं था, उसे सब बताया था। वह रोते-बिलखते हुए कब बच्ची को लेकर बाहर चली गई कि पता भी नहीं चला। दूसरी ओर बच्ची को ले जाने के दौरान स्टाफ ने अस्पताल के रजिस्टर में उससे अंगूठा लगवाया था। बड़ी निवासी सुगना पत्नी मदन गमेती की पुत्री सीमा को निमोनिया होने पर गत रविवार को बाल चिकित्सालय में भर्ती करवाया था। तडक़े 4 बजे उसने दम तोड़ दिया था।
पति बुलाने पर देता रहा गच्चे
आधार फाउण्डेशन के नारायण चौधरी व मानव सेवा समिति के प्रेम पालीवाल ने ठेकेदार के मार्फत सुगना के पति मदन को फोन कर सूचना दी। वह लगातार गच्चा देते हुए शव लेने नहीं पहुंचा। बाद में हाथीपोल थाना पुलिस ने बड़ी में मदन के मां-बाप का पता कर उन्हें फटकारते हुए अस्पताल बुलवाया और शव सुपुर्द किया।
‘पति’ छोडकऱ भागा मां-बेटी को
सुगना ने बताया कि वह कोटड़ा से सटे गुजरात बॉर्डर में मामेर क्षेत्र में रहती थी। बड़ी निवासी जेसीबी चालक मदन गमेती तीन साल पहले उसे भाग लाया। बिना शादी ही वह मदन के साथ बड़ी में रह रही थी, उससे बच्ची सीमा हुई। सुगना का कहना है कि पति के अन्य महिलाओं से संबंध होने से वह उसे प्रताडि़त कर रहा था। मां-बाप व सास-ससुर ने भागने के कारण कोई मदद नहीं की। बच्ची को सांस में तकलीफ होने पर मदन के ठेकेदार से दो हजार रुपए लेकर रविवार को अस्पताल लाई थी। भर्ती के दौरान मदन उससे पैसा लेकर अन्य महिला के साथ चला गया और वापस नहीं आया। इस बीच वह अस्पताल में इधर-उधर वार्डों में भटकती रही। किसी ने उसकी मदद नहीं की। पैसे, मोबाइल नम्बर नहीं होने से वह न तो किसी को बता पाई, न ही बुला पाई।
बच्ची को निमोनिया था, खून की भी कमी थी। रात को मां को इसकी गंभीर हालत के बारे में बता दिया था। वह वार्ड में बैठकर रोने लगी। उसके बाद वह बच्ची को लेकर बाहर निकल गई। पता चला कि पारिवारिक समस्या के कारण मृत बच्ची को कोई लेने नहीं आया तो वहीं बैठी रही। जानकारी में आने के बाद पुलिस को लिखकर दिया।
डॉ.आर.एल.सुमन, बाल रोग विशेषज्ञ
Published on:
24 Aug 2018 01:39 pm
