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पंजीयन हो तो रुके पूरक पोषाहार में गड़बड़ी…आंगनवाड़ी से जुड़े स्वयं सहायता समूहों का होना है पंजीयन

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anganwadi kendra

आंगनबाड़ी और आशा बहुओं के लिये खुशखबरी, बढ़ाया गया मानदेय

चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर . आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पूरक पोषाहार की आपूर्ति करने वाले स्वयं सहायता समूहों को अमृता सोसायटी और राजीविका में पंजीकृत करवाने के आदेश जारी हुए 15 दिन बीत गए, लेकिन अब तक आधे से ज्यादा समूह पंजीकृत नहीं हो सके हैं। यह पंजीकरण इसलिए करवाया जा रहा है ताकि पोषाहार में होने वाली गड़बड़ी को रोका जा सके लेकिन काम धीमा चल रहा है।
बाल विकास परिजयोजना अधिकारी ने 15 अक्टूबर को सभी महिला पर्यवेक्षकों को आदेश जारी करते हुए तीन दिन में अपने सेक्टर में संचालित स्वयं सहायता समूहों का पंजीकरण अमृता सोसायटी और राजीविका में करवाकर रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन कुछ ब्लॉक को छोडकऱ जिले के अधिकतर ब्लॉक में यह काम ठंडे बस्ते में पड़ा है। इन समूहों की ओर से पूरक पोषाहार की सप्लाई पर आंगनवाड़ी केन्द्रों पर की जाती है। प्रदेश के कुछ जिलों में पोषाहार सप्लाई में गड़बड़ी उजागर होने के बाद यह निर्णय किया गया ताकि सभी समूहों पर नजर रखी जा सके।

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राजीविका को नहीं मिली गाइड लाइन
गिर्वा सेक्टर की महिला पर्यवेक्षक धर्मनिष्ठा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके ब्लॉक में 60 से 65 स्वयं सहायता समूह है जिनका रजिस्ट्रेशन करवाने का काम किया जा रहा है। राजीविका से सम्पर्क किया लेकिन उनको कोई गाइड-लाइन ही नहीं मिली है। ऐसे में देरी हो रही है।


एकाधिकार खत्म करने का प्रयास
स्वयं सहायता समूहों का पंजीकरण करने से उन समूहों पर शिकंजा कस जाएगा जो एकाधिकार कायम करते हुए दूसरे समूहों को आगे नहीं आने देते और एक से ज्यादा जगहों पर पोषाहार और दूसरी सामग्री की सप्लाई वाला काम हाथ में ले लेते हैं जिसमें गड़बड़ी की संभावनाएं बहुत बढ़ जाती है लेकिन जब तक रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगा तब तक यह आसान नहीं है।