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हमारे गांव खिलाडि़यों की खान, देश दुनिया में दिला रहे पहचान

- मेवाड की माटी में पैदा हो रहे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी - कई गांवों की अब खेल और खिलाडि़यों से बन रही पहचान

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कई गांवों की अब खेल और खिलाडि़यों से बन रही पहचान

कई गांवों की अब खेल और खिलाडि़यों से बन रही पहचान

भुवनेश पंड्या

क्रिकेट हो या तीरंदाजी, एथलेटिक्स, वॉलीबॉल या दौड़। ऐसा कोई खेल नहीं, जिसमें उदयपुर जिले ने देश दुनिया में अपनी छाप नहीं छोड़ी हो। हमने देश को कई ऐसे हीरे दिए, जिन्होंने ना केवल अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभा का हुनर दिखाया, बल्कि देश काे विजयश्री भी दिलाई। हमने देश को अन्तरराष्ट्रीय ओलम्पियन से लेकर एशियाड में मेडल जीतने वाले हीरे दिए। एडवेंचर स्पोर्ट्स से लेकर हॉकी और मुक्केबाजी तक में हम अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। मुक्केबाजी में झलक तोमर ने कई अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीत कर उदयपुर का नाम गौरवान्वित किया है।

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हम नहीं किसी से कम...

शूटिंग खिलाडी अपूर्वी चंदेला ने उदयपुर में ही प्रशिक्षण लेकर अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित किया है। वालीबॉल में सुरेश खोइवाल एंड ब्रदर्स ने भारतीय टीम में रहते हुए कई बार भारत को जीत दिलाई है। आत्मिका गुप्ता ने निशानेबाजी मेंं अमरीका में सोने पर कब्जा किया। हमारे चेस के एक से एक बेहतरीन खिलाडी देश दुनिया में चमक रहे हैं तो जूडो, बैडमिंटन में भी नाम रोशन कर रहे हैं।

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ये दो एकडमी है हमारे पास :

राजकीय तीरंदाजी एकेडमी खेलगांव - यहां वर्तमान में झाडोल, कोटडा, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सिरोही के 30 खिलाड़ी हैं। छात्रावास वार्डन सुन्दर लोलावत ने बताया कि एनआईएस कोच रेणु मीणा सुबह व शाम प्रशिक्षण दे रही है।

राजकीय जनजाति हॉकी खेल छात्रावास - प्रदेश की पहली हॉकी एकेडमी में वर्तमान में 37 खिला़डी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन खिलाडि़यों को प्रशिक्षक संजय खान प्रशिक्षण दे रहे हैं।

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ये है खेल वाले गांव

बदराणा (झाडोल) वालीबॉल गांव - झाडोल के बदराणा गांव को वालीबॉल गांव के नाम से जाना जाता है। यहां करीब 35 खिलाड़ी विवि टीम में खेले हैं। इसमें से जगत सिंह झाला, कपिल सांचीहर, चंदन सांचीहर व ईश्वर सिंह झाला व अरविन्द मेघवाल सहित कई राष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। यहां वर्ष 2000 से पहले मैदान तक नहीं था, लेकिन अब सीनियर स्कूल में बच्चों ने हाथ से ही पहाड़ी खोदकर मैदान तैयार कर लिया। झाडोल में वॉलीबाॅल की शुरुआत अर्से पूर्व चन्द्रकान्त सांचीहर ने की थी।

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कोटडा तीरंदाजी का पर्याय - कोटडा यानी तीरंदाजी व फुटबॉल का गढ़ - जिले का कोटडा क्षेत्र तीरंदाजी खिलाडि़यों और फुटबॉल खिलाडि़यों का गढ़ है। यहां से बड़ी संख्या से राष्ट्रीय तीरंदाज निकले हैं तो आने वाले दिनों भी एक से एक खिलाड़ी उपजेंगे। वहीं ये गांव एक से बढ़कर एक फुटबॉल खिलाडि़यों काे तैयार कर रहा है। यहां से लक्ष्मणलाल दाडमिया, रसाराम बुमरिया खाखरिया गांव, लाडुराम बडली गांव, हरदयाल गमर- महाडी गांव, शांतिलाल खैर-पातरपाड़ी, रमणलाल पारगी - गुरा गांव, कुमारचंद खैर- पातरपाडी गांव सहित बिसियों नाम ऐसे हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर तीरंदाजी में नाम कर चुके हैं।

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कोटडा में निकले फुटबॉल के हीरे - कोटड़ा क्षेत्र के कई गांवों में फुटबॉल के हीरे हैं, जो जिला, राज्य व वेस्ट जोन से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक खेलकर गांव की माटी की महक पूरे प्रदेश में महका रहे हैं। इसमें संजय कुमार खैर, निर्मल कुमार गरासिया, रामलाल, मुकेश कुमार, गणेश कुमार खैर, महेन्द्र कुमार गरासिया, भंवरलाल खैर, मनीष कुमार पारगी, मनोज कुमार, अर्जुनलाल, नरेन्द्र कुमार जैसे खिलाड़ी ना केवल खुद खेलते हैं, बल्कि अन्य खिलाडि़यों की नई पौध भी तैयार कर रहे हैं

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गांव व क्षेत्र, जिनकी खेलों से पहचान

- फलासिया झाडोल - एथलेटिक्स, कबड्डी व हैंडबॉल

- ओगणा गोगुन्दा - हैंडबॉल

- खेरवाडा- तीरंदाजी व कबड़डी

- ऋषभदेव - टेनिस क्रिकेट बॉल

- मावली- शूटिंग वालीबॉल व हॉकी

- पडुना- कबड्डी

- वल्लभानगर भींडर- कबड्डी, वॉलीबाल व एथलेटिक्स

- कुराबड - कबड्डी

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अधिकांश खेलों में हम हाेंगे सरताज

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हम ज्यादातर खेलों में सरताज होंगे। गांवों में खेल प्रतिभाएं तराशने का कार्य जिला कलक्टर तारांचद मीणा की अगुवाई में पूरी तेजी से हो रहा है। अधिकांश स्थानों पर खेल मैदान तैयार हो चुके हैं।

शकील हुसैन, जिला खेल अधिकारी उदयपुर

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