
मोहम्मद इलियास/ प्रमोद सोनी उदयपुर . जिन आदिवासी घरों में खाने के भी लाले, वहां उनके नाम पर लाखों का बीमा! यह हकीकत है। बीमित परिवार को भी नहीं पता कि परिजन के नाम से कोई बीमा भी था। हां, उनके मरणोपरांत आश्रितों को 20-30 हजार जरुर मिले। उदयपुर के नाई में कई गांव हैं, जहां आदिवासियों का लाखों का बीमा कराया गया, 50 से 75 हजार रुपए का प्रीमियम जमा कराया। उनकी मौत होने के बाद में बीमा राशि कहां गई, अता-पता नहीं।
इस क्षेत्र में पिछले चार से पांच साल में 15 से अधिक मौतें भी हुई है। पत्रिका टीम ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य मिले।
एक परिवार में तो जिस व्यक्ति को करंट से मौत होना बताया गया, वहां बिजली का कनेक्शन नहीं नहीं मिला। पुलिस की ओर से भी यहां छानबीन की जा रही है, जिसमें प्रथम दृष्टया सरकारी नुमाइंदों से लेकर बैंक व बीमा के अधिकारी-कर्मचारी की लिप्तता सामने आ रही है।
इन गांवों के लोगों का उठा बीमा
नाई, कविता, नयाखेड़ा, चोकडिय़ा, पोपटी, नोहरा, नालफला, बोरीफला
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गोपनीय सूचनाएं प्राप्त हुई है। गड़बडिय़ां तो हैं। मामले की जांच की जा रही है। पूरा मामला जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
राजेन्द्र प्रसाद गोयल, पुलिस अधीक्षक
केस-1 : खाने के फाके, बीमा उठा 10 लाख
मजदूर नाना की पानी गर्म करते गत वर्ष अप्रेल में रॉड में करंट से मौत बताई। इस घर में बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। मौत से पहले 5-5 लाख की दो पॉलिसी की गई और नॉमिनी उसके पुत्र गिरधर को बताया गया, पिता की मौत के बाद राशि उठ गई।
केस-2 : रिश्तेदार के नाम लिए 1.20 करोड़
गिरोह के सरगना ने रिश्तेदार की मौत को दुर्घटना बता 1.20 करोड़ का बीमा उठाया। एफआईआर में जिस गाड़ी से दुर्घटना बताई उसका चालक संदेह के घेरे में है। दुर्घटना के बाद अस्पताल ले जाना वाला भी गिरोह सदस्य बताया। 3 बीमा कंपनी के लोग शामिल रहे।
इनका इतना बीमा
हमेरसिंह राजपूत- दुर्घटना में मौत - 1.20 करोड़ - बीमा राशि उठी
रामलाल गमेती - सांप के काटने से मौत - 18 लाख का बीमा, अभी मामला लंबित
नाना गमेती - करंट से मौत- 10 लाख का बीमा पास
गेहरीलाल मेघवाल - खेत में काम करते मौत - 20 लाख का बीमा पास
वालिया गमेती - कैंसर से मौत- बीमा कागज पर हस्ताक्षर करवाए
यूं चलता है खेल
गिरोह ने बीमारी से ग्रसित आदिवासी से संपर्क कर इलाज के नाम पर उधार दिया।
परिवार के विश्वास पात्र व्यक्ति को नोमिनी बताकर लाखों का बीमा किया।
बैंक खाता खुलवाया, अंगूठा छाप लोगों की चेकबुक व एटीएम इश्यू करवाई।
बीमा होने के महज एक या दो साल में ही बीमित व्यक्ति की मौत पर राशि गिरोह ने उठा ली।
Updated on:
30 Mar 2018 12:20 pm
Published on:
30 Mar 2018 12:15 pm
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