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यहां के मरीजों को नहीं सरकारी सुविधा पर ऐतबार, चिकित्सा स्टाफ खुद ही ‘बीमार

PHC मोहम्मद फलासिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला, पहाड़ी के एक ओर बसे केंद्र में जाने से कतराते हैं लोग, रात में नहीं रूकते चिकित्सक, कंपाउंडर ही होता है चिकित्सक
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यहां के मरीजों को नहीं सरकारी सुविधा पर ऐतबार, चिकित्सा स्टाफ खुद ही 'बीमार

यहां के मरीजों को नहीं सरकारी सुविधा पर ऐतबार, चिकित्सा स्टाफ खुद ही 'बीमार

दयपुर/ झाड़ोल. PHC बिना रणनीति के तैयार मोहम्मद फलासिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों का ऐतबार नहीं है। ऐसा नहीं कि यहां के चिकित्सक या नर्सिंग स्टाफ योग्यता नहीं रखते। बल्कि इसलिए कि पहाड़ी हिस्से में बसे हुए स्वास्थ्य केंद्र पर भौगोलिक कारणों के चलते लोगों का उपचार के लिए जाने का रूझान कम रहता है। इन खामियों के अलावा झाड़ोल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की नजदीकियां भी इसके लिए कुछ हद तक जिम्मेदार हैं। खामियां ही हैं कि बीते १३ वर्ष में प्रसव के नाम पर केवल ३० महिलाएं ही पहुंची हैं। यह कह सकते हैं कि ये प्रसूताएं भी मजबूरी की मारी ही रही होंगी। मरीजों के कम रूझान के अलावा चिकित्सक आवास की कमी भी लोगों पर भारी है। आवास के अभाव में रात के समय चिकित्सक यहां नहीं रूकते। ऐसे में रात के समय कंपाउंडर ही मरीजों को दवा लिखते हैं। ऐसी ही ढेरों खामियों ने चिकित्सा विभाग की रणनीति और ग्रामीण स्वास्थ्य के प्रति सजगता की पोल खोल रखी है।

एकांत में पीएचसी
ग्राम पंचायत बदराणा के राजस्व रिकॉर्ड क्षेत्र के पहाड़ी इलाके में मोहम्मद फलासिया पीएचसी बसी है। ऊंचाई वाले इलाके में एकांत में होने से इस ओर जाने का आम आदमी साहस नहीं जुटाता। आलम यह है कि खुद बदराणा के रोगी भी वहां नहीं पहुंचते। बीमार लोग पहाड़ी हिस्से का जोखिम उठाने की बजाए ५ किलोमीटर दूर झाड़ोल सीएचसी पर उपचार कराना ज्यादा पसंद करते हैं।
स्टाफ के लिए भी सुविधा नहीं
पीएचसी परिसर में सरकारी आवास की सुविधा नहीं है। ऐसे में रात के समय में चिकित्सक का रूकना संभव नहीं होता। अन्य स्टाफ भी दूरी पर रहता है। आलम यह है कि शाम ६ बजे बाद पीएचसी पर ताला लटक जाता है। मजबूरी में रात के समय मरीज झोलाछापों की शरण में जाने से भी नहीं कतराते। बारिश के दौरान पीएचसी की टपकती हुई छत भी नित नई परेशानी खड़ी करती है। पहुंच मार्ग की उबड़-खाबड़ सड़क के कारण भी मरीज वहां पहुंचने से जी चुराते हैं। पीएचसी परिसर में बिजली की आंख मिचौनी भी किसी बड़ी बीमारी से कम नहीं है।

13 साल में केवल 30 डिलेवरी
हकीकत यह है कि बीते 13 साल में पीएचसी में केवल 30 किलकारियां गूंजी है। वर्ष 2006 से 2019 के बीच ये आंकड़े दर्ज किए गए हैं। ये डिलेवरी भी जनवरी 2019 से अब तक के बीच हुई है। कहने को यहां पर दो चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से एक ही सेवारत है। दूसरा चिकित्सक डॉ. रमेश कटारा वर्तमान में झाड़ोल सीएचसी पर प्रतिनियुक्ति पर है। इसके अलाव अन्य कई पद रिक्त हैं।

पता ही नहीं झोलाछाप
क्षेत्र के बदराणा, मगवास, दमाणा में झोलाछापों की दुकानें अधिकता से सक्रिय हैं। दूसरी ओर चिकित्सा अधिकारी वीरेंद्रसिंह डोडियार ने बताया किउन्हें झोलाछापों की सक्रियता के बारे में जानकारी ही नहीं है।

कहता पीएचसी का सच
पीएचसी का नाम: मोहम्मद फलासिया
कर्मचारी- एक चिकित्सक कार्यरत एक प्रतिनियुक्ति पर
स्थापना तिथि- 25 अपे्रल 2006
ओपीडी प्रतिदिन- औसत 25 -30 मरीज
वाहन सुविधा- नहीं
दूरस्थ गांव- गोदावाड़ा 13 किलोमीटरपेराफेरी के गांव- गोदावाडा, बरबली, उपस्वास्थ्य केन्द्र के 5 से अधिक गांव।इन ग्राम पंचायतों से नाता: बदराणा, गोगला, गोदाणा, खाखड़, मगवास, दमाणा ग्राम पंचायतें आती हैं।
राजस्व गांव: दमाणा तालाब, गोदावाड़ा, बरबली, किरट, ढिकलीया मगवास, नयागांव, सगपुरा, खाखड़, अमरपुरा, गोगला नाल, लाखागुड़ा, नयारहट, लीलावास, आवरड़ा खाखराखेड़ा, नेतावली, महादेवजी का काड, गोदाणा सहित अन्य गांव।

बिजली व पानी बाधा
पीएचसी में बिजली व पानी की समस्या है। आवास की सुविधा भी नहीं है। एकांत में होने के कारण मरीज कम आते हैं। झोलाछाप चिकित्सकों की जानकारी नहीं है। डॉ वीरेन्द्र सिंह डोडीयार,प्रभारी चिकित्सा अधिकारीआवास के अभाव में चिकित्सक नहीं रूकते। वांछित स्टाफ भी कम है। PHC ग्रामीण मरीज झोलाछापों के पास उपचार कराने को मजबूर हैं। प्रकाश चन्द्र डूंगरी, सरपंच, बदराणा