
बेटे ने मांगा खाना तो मां बोली- 'कहां से बनाऊ बेटा घर में न आटा है न राशन', भुखमरी से परेशान ये दम्पती जिंदगी के बदले मांग रहे मौत
कमला शंकर श्रीमाली / कानोड़ . सरकारी योजनाओं का इंतजार करते करते आंखें थक गई है। योजनाओं का फायदा कब पहुंचेगा, यह तो पता नहीं लेकिन अभी एक वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पा रही है। कभी खाना मिले तो ठीक अन्यथा भूखा ही सोना पड़ता है। किसी से एक-दो किलो ग्राम अनाज मांगकर घर का गुजारा करने वाला यह परिवार इन दिनों भूखा मरता मौत मांग रहा है।
यह व्यथा पंचायत के किसी गांव की नहीं बल्कि कानोड़ नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड 7 के बावजी की भागल माताजी के मंदिर के पास टूटी टपरी में रहने वाले बुजुर्ग दंपती की है। 80 वर्षीय गोकल पुत्र उदा मीणा बहरा व पैरों से अपाहिज हो चला है। उसकी पत्नी अणछाई नेत्रहीन होकर पति का सहारा बनी है। अणछाई के तीन पुत्रों में से एक मानसिक विक्षिप्त है तो दोनों पुत्र अलग रह रहे हैं।
आज कुछ नहीं खाया
पत्रिका की टीम जब दपंती से मिलने घाटियों से गुजर कर उसके घर पहुंची तो बुजुर्ग अपनी झोपड़ी के बाहर बैठा था तो उसकी अंधी पत्नी अणछाई पास बैठकर रुदन कर रही थी। पूछने पर हाथ जोडकऱ कहने लगी आज कुछ खाया नहीं। उसका कहना था कि मैं तो भूखी रह लेती हूं लेकिन पति को आंखों के सामने कैसे भूखा देखूं यह सहन नहीं हो रहा है।
कुछ खाने का लाए हो?
पत्रिका टीमको देखते ही मानसिक विक्षिप्त पुत्र बोल पड़ा कुछ खाने का लाए हो ? भूख लगी है। हमने पूछा कि आज खाना खाया या नहीं तो बोला ‘बाई बनाई को खावा, तो बाई बोली- कहां से बनाऊ बेटा घर में न आटा है न राशन।’ उनकी व्यथा सुनकर मन झकझोर उठा और यह सवाल उठने लगा कि सबका साथ सबका विकास की डींगे हांकने वाली सरकार कहां है? कहां है सरकार के नुमाइंदे जो अपने क्षेत्र को खुशहाल होने की बात कहकर वाहवाही लूटने में लगे हैं।
आवेदन नहीं मिला है। फिर भी अगर ऐसी समस्या है, पेंशन बंद है तो पीपीओ नम्बर चेक करवाकर पीडि़त को पेंशन व खाद्य सुरक्षा में जुड़वाकर गेहूं दिलवाया जाएगा। अधूरे आवास के लिए पालिका से जानकारी लेंगे।
- अनिल शर्मा, एसडीएम, वल्लभनगर
ऐसा कोई परिवार जानकारी में नहीं आया है। कल पता करवाकर समस्या का समाधान करवाते हुए हरसंभव मदद की जाएगी। किसी को कोई समस्या है तो पालिका में आकर बताएं।
- अनिल कुमार शर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका कानोड़
Published on:
08 Jun 2018 04:58 pm
