
चमचमाते भवन के अंदर 'खोखलापन'
शंकर पटेल/गींगला . सरकार की ओर से नि:शुल्क दवा, नि:शुल्क जांच समेत कई तरह की चिकित्सा योजनाएं संचालित है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर स्थिति दयनीय है। बरसात के साथ ही जल जनित मौसमी बीमारियों के प्रकोप से हर कोई आहत है, वहीं सरकारी तौर पर चिकित्सा सुविधाओं का भारी अभाव है। इसी को लेकर राजस्थान पत्रिका ने हर गांव-कस्बे तक पहुंचकर पड़ताल की है। करावली पीएचसी की रिपोर्ट-
करावली का नवनिर्मित पीएचसी भवन एक करोड़ 30 लाख की लागत से बना। दूर से भवन चमचमाता नजर आता है, लेकिन अंदर देखें तो दीवारों में दरारें साफ देखी जा सकती है। भवन निर्माण के बाद पहला ही बरसात का मौसम आया और इसमें ही छत टपक रही है। लिहाजा केन्द्र भवन के निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं।
वर्ष 2013 में उपस्वास्थ्य केन्द्र से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में क्रमोन्नयन की घोषणा हुई, लेकिन पांच साल तक महज दो पुराने कमरों में ही पीएचसी संचालन हुआ। दो अक्टूबर 2018 को नए भवन का उद्घाटन हुआ था, जबकि शिलान्यास एक फरवरी 2018 को ही कर दिया गया था। आठ माह में भवन बना, लेकिन इस बरसात में दुर्दशा सामने आ रही है। पानी टपकने से दवाएं खराब होती है। प्रसव कक्ष में फर्श पर ही बैटरी लगा रखी है, जिससे करंट का खतरा बना रहता है।
ग्रामीण अमरचंद पटेल, मांगीलाल सेवक, नाथूलाल सुथार, हीरालाल सेवक, सोहन लाल मीणा ने बताया कि पीएचसी भवन की छत बरसात के पहले मौसम में ही टपकने लगी है। ये घटिया निर्माण का नतीजा है। ऐसे तो भवन ज्यादा सालों तक चलना भी मुश्किल है।
एक एएनएम कर रही तीन का काम
डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि पीएचसी पर पिछले माह 42, जबकि सेक्टर के अधीन 92 प्रसव संस्थागत हुए। एक ही एएनम का पद कार्यरत है, जबकि दो और एएनएम की जरूरत है। इसके अलावा पीएचसी पर एलएचवी, फस्ट ग्रेड मेल नर्स, फार्मासिस्ट, चपरासी के एक-एक पद खाली है। स्टाफ की कमी से परेशानी होती है। कई बार मरीजों की कतारें लग जाती है।
कच्चे रास्ते से गुजरने की मजबूरी
पीएचसी भवन दूर से चमचमाता नजर आता है, लेकिन स्टेट हाइवे से पीएचसी तक पहुंचने के लिए 500 मीटर का कच्चा रास्ता ही है। यहां सड़क भी नहीं बन पाई। बरसात में कई बार कीचड़ से गुजरना लोगों की मजबूरी हो गई है।
नवनिर्मित पीएचसी में कई जगहों पर पानी टपकता है, जिससे परेशानी होती है। उच्चाधिकारियों को भी अवगत कराया है। स्टाफ की कमी है। जैसे-तैसे व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।
डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी, पीएचसी करावली
भवन में छत टपकने की समस्या पूर्व में भी एनआरएचएम के इंजीनियर को बताई। ठेकेदार को भी कहा, लेकिन सुधार नहीं हुआ। फिर से हालात से अवगत कराया जाएगा। विभागीय उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजी जाएगी।
डॉ. गजानंद गुप्ता, बीसीएमओ, सलूम्बर
ठेकेदार को कहकर मरम्मत करवाई थी। फिर भी पानी टपकने की समस्या आ रही है तो निरीक्षण करता हूं। हालांकि ठेकेदार का 3 साल का गारंटी पीरियड है। सुधार करवा दिया जाएगा।
रामसिंह कोठारी, एईएन, एनआरएचएम उदयपुर
Published on:
21 Sept 2019 02:58 am
