
इटली का वह शहर जिसको लेकर उदयपुर की सियासत हर बार गरमा जाती है...
चन्दनसिंह देवड़ा/उदयपुर. पिछले दो-ढाई दशक से आयड़ के विकास का सपना दिखाया जा रहा है। इस बीच केन्द्र से लेकर राज्य में सरकारें बदली, जनप्रतिनिधि बदलें, लेकिन आयड़ का विकास तो नहीं हुआ, गंदगी जरूर बढ़ गई। अब विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के घोषणा पत्रों से आयड़ को वेनिस बनाने का वादा नदारद है। न जनप्रतिनिधि कुछ बोल रहे हैं और ना ही मतदाता मुंह खोल रहे हैं। आयड़ विकास के लिए आंसू बहा रही है और मांग रही है अब तक का हिसाब।
दिखाया यह सपना — आयड़ नदी को वेनिस बनाया जाएगा।
— इसके किनारे पाथ-वे बनेंगे, जहां पर स्ट्रीप गार्डन में फूलों की क्यारियां महकेगी। लोग उनमें सुबह-शाम घूम सकेंगे।
— नदी पेटे में वाटर पूल होंगे जिसमें साफ पानी भरा रहेगा। पक्षी कलरव करेंगे
मछलियां तैरती दिखेगी
— वाटर स्पोट्र्स की गतिविधियां संचालित होगी।
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यह देखिए असल का वेनिस
समंदर पर खड़ी एक शानदार नगरी जिसकी बहती और बल खाती लहरें, उसकी सडक़े और तंग गलियां है।
कई लोग जब पहली बार वेनिस में कदम रखते हैं तो उन्हें ऐसा लगता है मानो वे समय की धारा में दो या तीन सौ साल पीछे चले गए हैं। पूरी नगरी का माहौल ही बिलकुल अलग है।
नहरों पर जहां-जहां पत्थरों के बने मेहराबदार पुल आते हैं, वहां टै्रफिक की आवाज सुनाई देती है। यहां मोटर गाडिय़ों के बजाय कश्तियां चलती है।
नगरी के मुख्य चौक यानी सेंट मार्क चौक पर खुली हवा में रेस्तरां हैं जहां पर सैलानियों और निवासियों की भीड़ लगती है।
ग्रैंड कैनाल पर मशहूर रीयाल्टो पुल इस नगरी का सबसे मुख्य रास्ता है। यहां पर सैलानियों की भीड़ इस शानदार पुल को और उसके नीचे से बिना आहट किए गुजरने वाले पतले और काले रंग की गॉन्डोला की नौका को देखने आती है।
इसलिए उठी मांग
आयड़ को वेनिस नदी की तरह स्वच्छ बनाने का सपना करीब दो से ढाई दशक पुराना है। शहर के विस्तार के साथ इसमें समाने वाली शहर की गंदगी बढ़ती गई है। लोगों ने इसके गंदे पानी से सब्जियां उगानी शुरू कर दी। उदयसागर इससे गंदा हो रहा है। ऐसे में यह तय किया गया कि नदी के दोनों तरफ बड़े नाले बने, जिसमें गंदा पानी बहे और आगे जाकर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट हो जाए। नदी में पानी भरा रखकर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें।
साढ़े 15 किमी में से सिर्फ 2300 मीटर लाइन बिछी
आयड़ नदी में गिरने वाले करीब 139 नालों को ट्रंक लाइन से जोडऩा है जिसके लिए 125 करोड़ रुपए का बजट है जिसमें साढ़े 15 किलो मीटर लम्बी ट्रंक लाइन बिछानी है। अभी तक आरयूआईडीपी केवल 2300 मीटर लाइन ही बिछा सका है। कार्य की धीमी गति से आयड़ का थोड़ा बहुत स्वरूप भी निखर नहीं पाया है।
''वास्तव में ट्रंक लाइन का काम धीमा चल रहा है। पहले बारिश की वजह से काम प्रभावित रहा। बाद में ठेकेदार की लेबर कम हो गई। अभी चुनाव से काम पर असर पड़ रहा है। वर्किंग पार्टियां बढ़ाकर काम जल्द खीचेंगे।'' — रामपाल, अधिशासी अभियंता, आरयूआईडीपी
Updated on:
05 Dec 2018 04:33 pm
Published on:
05 Dec 2018 03:14 pm
