
भाजपा तीन धड़ों में बंटी, दो के बीच जंग, तीसरा देख रहा तमाशा (पत्रिका क्रिएटिव फोटो)
उदयपुर: भाजपा नेत्री के कथित वीडियो, ब्लैकमेलिंग और बलात्कार के चर्चित मामले में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। जांच अधिकारी बदलने के बाद एक बार फिर यह मामला शहर की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
बता दें कि अब तक जहां उदयपुर भाजपा दो धड़ों में बंटी दिखाई दे रही थी। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद पहली बार पार्टी के भीतर तीन अलग-अलग खेमे साफ नजर आने लगे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पहला धड़ा उन नेताओं और कार्यकर्ताओं का है, जिनके नाम या भूमिका इस पूरे घटनाक्रम से किसी न किसी रूप में जुड़ी बताई जा रही है।
वहीं, दूसरा धड़ा वह है जो पूरे मामले को लगातार हवा दे रहा है और घटनाक्रम को सार्वजनिक बहस का विषय बनाए हुए है। तीसरा धड़ा सबसे दिलचस्प माना जा रहा है, यह वह वर्ग है, जो न खुलकर पक्ष में बोल रहा है और न ही विरोध में। इस धड़े में कई ऐसे दिग्गज नाम शामिल हैं, जो पहले कई मुद्दों पर खुलकर विरोध दर्ज कराते रहे हैं। लेकिन 'उदयपुर फाइल्स' पर उन्होंने चुप्पी साध रखी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उदयपुर भाजपा इस समय जिस तरह के अंदरूनी दौर से गुजर रही है, वैसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली। नगर निकाय और पंचायतीराज चुनाव नजदीक है और इसी बीच यह मामला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि विवाद लंबा चला तो राजनीतिक असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
भाजपा के लिए राहत की बात यह भी है कि कांग्रेस मामले को अपेक्षित ढंग से भुना नहीं पाई। कांग्रेस ने एक दिन धरना-प्रदर्शन करके मुद्दा उठाया जरूर, लेकिन उसके बाद ठंडे पड़ गए।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता सीमित ही रही। इसके पीछे कई तरह के कयास हैं। कोई इसे जातिगत समीकरणों से जोड़कर देख रहा है तो कोई व्यावसायिक रिश्तों का असर मान रहा है।
जांच अधिकारी बदलने के बाद उम्मीद जगी है कि प्रकरण की नए सिरे से निष्पक्ष जांच होगी। हालांकि, कई सवाल अनुत्तरित है। मामला सिर्फ भाजपा नेत्री तक सीमित नहीं, बल्कि 11 फरवरी की रात दी गई दबिश को लेकर भी है।
विशाल के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने भाजपा नेता के साथ पहुंचकर तोड़फोड़ और मारपीट की। इसका परिवाद अब भी जांच में है। अब सवाल है कि क्या नए जांच अधिकारी भाजपा नेत्री की रिपोर्ट की जांच ही करेंगे या फिर 11 फरवरी की रात हुई कार्रवाई को भी देखेंगे।
इधर, भाजपा के वरिष्ठ नेता के हालिया उदयपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में हुई जनसुनवाई भी चर्चा का विषय रही। पिछली बार जब जनसुनवाई हुई थी, तब आरोपी विशाल के परिजनों ने पीड़ा सुनाई थी।
उस समय यह मुद्दा दिल्ली तक भी पहुंचा था कि आरोपी पक्ष की सुनवाई हो रही है। लेकिन भाजपा नेत्री को नहीं बुलाया गया। गुरुवार को फिर जनसुनवाई हुई, लेकिन न तो भाजपा नेत्री पहुंचीं और न ही आरोपी के परिजन।
गुरुवार को भाजपा पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें आगामी कार्यक्रमों की तैयारी पर बात हुई, लेकिन चर्चा का केंद्र 'उदयपुर फाइल्स' भी रही। सूत्रों के अनुसार पदाधिकारियों ने प्रकरण से दूरी बनाने की बात कही।
कहा कि पार्टी का ही विरोधी खेमा मुद्दे को हवा दे रहा। भरोसा जताया कि घटनाक्रम की जानकारी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दी है और फिलहाल किसी के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की संभावना नहीं है।
Updated on:
6 Mar 2026, 11:05 AM IST
Published on:
6 Mar 2026, 11:05 AM IST
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