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राजस्थान की एक खतरनाक कुप्रथा है मौताणा, प्रशासन भी है बेबस, जानें

Udaipur News : क्या है मौताणा?। राजस्थान की एक कुप्रथा। आजादी के अमृतकाल में नश्तर सा चुभता है मौताणे का कलंक। मौताणे ने छीन लिए कई घर बार। दर-दर भटक रहे कई परिवार, प्रशासन भी बेबस है।

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Mautana Udaipur - File Photo

Mautana Customs : आज भले ही देश आजादी के अमृतकाल में सांस ले रहा हो लेकिन मेवाड़ के आदिवासी अंचल में मौताणा जैसी कुप्रथा न केवल समाज के माथे पर कलंक है बल्कि प्रशासनिक अमला भी बेबस है। आलम यह है कि समाज के पंचों द्वारा तय मौताणा राशि अदा नहीं करने की सजा पूरे परिवार को झेलना पड़ रहा है। उन्हेें अपना घर बार छोड़ अन्यत्र शरण लेनी पड़ रही है। उदयपुर जिले की सुदूर पंचायत समिति कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया के गांवों में दो दशक में मौताणे के दंश ने सौ से अधिक परिवार गुजरात मजदूरी करने निकल गए या फिर आसपास के गांवों में कुटिया बनाकर अपना पेट पाल रहे हैं।



पुलिस और प्रशासन भले ही कठोर कानून और कड़ी सजा की बात करें लेकिन हकीकत अलग है। मकान और गांव छोड़कर पलायन कर चुके परिवार गुजरात और राजस्थान के बाड़मेर, जालोर, सिरोही, पाली, पिंडवाड़ा तहसील के आसपास के गांवों में छोटे-छोटे बच्चों के साथ झुग्गी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं। वहीं इन परिवारों के 500 से अधिक बच्चों की पढ़ाई भी चौपट हो गई है।

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आदिवासी परिवार में किसी व्यक्ति की हत्या हो जाए, प्राकृतिक रूप से या दुर्घटना में मृत्यु हो जाए तो मृतक पक्ष आरोपी पक्ष से मौत का आणा यानि राशि की मांग करता है। आदिवासी समाज के पंच ही मौताणा राशि तय करते हैं। तय अवधि में मौताणा राशि पंचों के सम्मुख जाजम पर रख देता है। कुछ राशि को छोड़कर शेष राशि पीड़ित पक्ष को सौंप दी जाती है और मामला शांत हो जाता है।



एडवोकेट एवं सामाजिक कार्यकर्ता हिम्मत तावड़ ने बताया धमकी, मारपीट, हत्या के डर से बेकसूर लोग वापस अपने गांव नहीं लौट पाते हैं। मौताणा को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन का सहयोग जरूरी है।



पुलिस उपाधीक्षक कोटड़ा रामेश्वरलाल ने बताया कि क्षेत्र में ऐसे कई मामले हैं। इनके पंच, प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में सामाजिक स्तर पर बातचीत और समाधान के बाद ही पुनर्वास संभव है।



मांडवा थाना क्षेत्र केजूनापादर निवासी बाबूलाल अंगारी का उसके पड़ोसी से जमीन विवाद में झगड़ा हो गया। बाबूलाल ने पड़ोसी के साथ मारपीट कर दी। घटना के बाद ग्रामीणों ने बाबूलाल के घर को ध्वस्त कर दिया।



मांडवा के झेड ग्राम पंचायत के भाटा का पानी गांव में वर्ष 2008 में नशे की हालत में हुए झगड़े में अलिया नामक युवक की मृत्यु हो गई। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और कोर्ट से भी सजा हो गई।

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