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कराटे गर्ल लता की दीवानी हैं आदिवासी अंचल की बालिकाएं, पूरे गांव को है गर्व

Rajasthan News : लता पंडिया उदयपुर झाड़ोल तहसील के एक छोटे से गांव आवरड़ा की कराटे गर्ल हैं। अपने क्षेत्र की बालिकाओं को लता पंडिया कराटे सीखने के लिए प्रेरित कर रही है। आदिवासी अंचल की बालिकाएं कराटे गर्ल लता की दीवानी हैं। लता की इस उपलब्धि से पूरे गांव व परिवारजन में हर्ष है।

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लता पंडिया उदयपुर झाड़ोल तहसील के एक छोटे से गांव आवरड़ा की हैं कराटे गर्ल

Rajasthan News : बच्चों को सही समय पर सही दिशा मिल जाए, तो कम उम्र में ही वे इतिहास रच देते है। ऐसी बुलंदियां छूते हैं कि चारों तरफ उनकी मेहनत और हुनर की वाहवाही होती है। ऐसा ही कमाल किया है झाड़ोल तहसील के एक छोटे से गांव आवरड़ा की रहने वाली 20 वर्षीय लता पंडिया ने। कम उम्र में ब्लैक बेल्ट का तमगा हासिल करने वाली लता झाड़ोल तहसील की पहली बालिका है। जो अब अपने क्षेत्र में बालिकाओं को बालिका शिक्षा के साथ-साथ कराटे सीखने के लिए भी प्रेरित कर रही है। लता ने स्प्रिचुअल मार्शल आर्ट एकेडमी झाड़ोल (उदयपुर) से प्रशिक्षण प्राप्त कर 2021 में रेसलिंग ग्रेपलिंग में राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता और एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। इसके बाद हाल ही में आयोजित बेल्ट परीक्षा समारोह में भी उसने शानदार प्रदर्शन कर कराटे आर्ट में ब्लैक बेल्ट हासिल किया।

बदलते दौर में बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा बेहद जरूरी - कराटे गर्ल लता

कराटे गर्ल लता का कहना है कि आज के बदलते दौर में बालिकाओं को आत्मनिर्भरता के लिए आत्मरक्षा बेहद जरूरी है। इसके लिए लड़कियों को आगे आना चाहिए। लता की इस उपलब्धि से पूरे गांव सहित परिवारजन में हर्ष है।

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कम उम्र में किया कमाल

कराटे गर्ल लता मात्र 20 वर्ष की आयु में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी को कराटे सिखाओ’ के संदेश को लेकर सभी क्षेत्रीय बालिकाओं को प्रेरित कर रही है। वह खुद भी मार्शल आर्ट व ग्रेपलिंग में अभ्यास कर रही है। वह झाड़ोल में कराटे कोच सेंसेई तुषार मेहता से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। लता का कहना है कि उसे प्रोत्साहित करने में उसके माता-पिता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिसकी वजह से यह उपलब्धि उसने हासिल की।

माता-पिता ने दिया पूरा साथ

कराटे गर्ल लता का कहना है कि गांव में अन्य बालिकाओं को कराटे सीखने व शिक्षा के प्रति जागरूक करने में उसके पिता सुरेश पंडिया, माता सुमित्रा पंडिया व छोटा भाई दिग्विजिय ने पूरा सहयोग किया। सभी उसकी मदद करते हुए गांव-गांव में बालिकाओं को प्रेरित कर कराटे से जोड़ते है और आत्मरक्षा के क्षेत्र में बालिकाओं को सशक्त करते है। माता-पिता कृषि का कार्य करते है। लता शिक्षा के क्षेत्र में भी स्वयं स्नातक तृतीय वर्ष की छात्रा है।

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