
ग्राउंड जीरो से जन-मन : दिन में चैन, रात को खाना नहीं फिर कैसी स्मार्ट सिटी
मुकेश हिंगड़ की रिपोर्ट/ उदयपुर. चैन की जिंदगी जीने की चाहत से भरे उदयपुर वाले शाम की ठंडी हवा लेने और वॉक के लिए फतहसागर झील की पाल पर पहुंच जाते हैं, जहां बातों ही बातों में लेकसिटी, क्रिकेट, नई फिल्म के बीच आजकल चुनाव की बातें भी होने लगी हैं। महिलाएं भी पीछे नहीं। जब महिलाओं से चुनाव और मुद्दों पर बातचीत की तो उनके चेहरे पर चिंता और बात में गुस्सा था। कहा-चैन से रहते हैं लेकिन इस गले की चेन छिनने वालों ने हमारा चैन ही छीन लिया। घर से निकलते समय गले में सोने की चेन है तो असुरक्षा की चिंता भी रहती है।
फतहसागर ओवरफ्लो के पास ही बच्चों की मौज-मस्ती के बीच बैठे माताजी कंचन बाई कहती है कि गले में से चेन खींचकर ले जाने की घटनाएं हो रही है। पुलिस उनको पकडऩे की बजाय सलाह देती है कि गले में चेन मत पहनकर निकले....। पास ही बैठी एमकॉम कर रही दीप्ति बोली कि स्मार्ट सिटी सीसीटीवी से लैस है फिर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं, यह बात कई सवाल खड़े करती है। फतहसागर की लहरों के पास से होते हुए मैं मुम्बइयां बाजार की कोल्ड कॉफी की चुस्कियां लेती की भीड़ के बीच चला, वहां गपशप के बीच जब मुद्दे पूछे तो बोले कि साफ-सफाई तो दिख रही है लेकिन यहां रात को 12 बजे खाने को कुछ नहीं मिलता है। बड़ा शहर है, पर्यटन नगरी है लेकिन यह बड़ा मुद्दा है, रात भर चले ऐसा बाजार तो उदयपुर में होना चाहिए। बोले, हम अक्सर देर रात को कभी बाहर से आते हैं तो बिस्किट, ब्रेड से पेट भरना होता है। वेटर से जब चुनाव का माहौल पूछा तो बोला कि हमें पता नहीं है, काम से ही फुर्सत नहीं है, सब एक जैसे है, क्या बोलें।
दिन में शहर की पतली गलियां नापते हुए लोगों से बात की तो कुछ बोले, पीएम नरेन्द्र मोदी बढिय़ा कर रहे हैं तो कुछ बोले राजस्थान वालों ने कुछ नहीं किया। भट्टियानी चौहट्टा क्षेत्र की सुथारों की घाटी में घनश्याम श्रीमाली टूटी सीवरेज लाइन बताते हुए बोले कि यह लीक है, यह गन्दगी पानी की लाइन में जा रही है। पार्षद से लेकर अफसरों तक को बता दिया लेकिन सब चक्कर दे रहे हैं। आगे बढ़े तो गणपत बोले कि स्मार्ट सिटी बन रही है इसलिए खुदाई हो रही है लेकिन तब तक धूल-मिट्टी ही खाएंगे क्या?
घंटाघर एवं हाथीपोल में लोगों से बात की तो वे बोले कि हमारे यहां पार्किंग की समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला, घंटाघर पर तो त्योहारी सीजन में जाम हो जाता है। हाथीपोल से अश्विनी बाजार तक पार्किंग की समस्या दिखने को मिली क्योंकि गाडिय़ां सडक़ों पर ही खड़ी थी। देहलीगेट के करीब बैंक तिराहा पर चाय की चौपाल लगी थी, वहां खड़े मेडिकल व्यवसाय से जुड़े अभय बोहरा ने कहा कि मोदी से खुश हूं, उदयपुर में काम की बात पूछी तो बोले उतना मजा नहीं आया परन्तु राजनीति झगड़े जरूर देखे।
चाय पिलाने वाले राजेश तेली बोले उदयपुर में एलिवेटेड रोड बननी चाहिए, चाय पीने को आए भगवतीलाल बोले कि भामाशाह योजना का लाभ लोगों को मिला परन्तु कई लोग इससे वंचित हैं। आगे एक एटीएम पर ललित शर्मा बोले कि अधिकतर एटीएम काम नहीं करते है, बैंकों में समस्याएं बढ़ गई है... पता नहीं कैसे दिन आ गए हैं। शक्तिनगर की नई सडक़ से गुजरे तो सडक़ पर वाहन निकलने की जगह कम थी क्योंकि चारपहिया वाहनों की पार्किंग सडक़ पर ही कर रखी थी। वहां गोवर्धन राठौड़ से चुनावी मुद्दा पूछा तो वे बोले, शक्तिनगर की सडक़ तो अच्छी बना दी लेकिन टाउन हॉल से देहलीगेट की तरफ जाने का लिंक रोड नहीं है। हम नगर निगम व प्रशासन के पास भी गए परन्तु रास्ता खोला नहीं।
चुनावी मुद्दे की टोह लेते हुए कुम्हारों का भट्टा, टेकरी, संतोषनगर होकर हिरणमगरी पहुंचा। रास्ते में जिससे भी मुद्दे पूछे तो बोले पहले तो टूटी सडक़ों से निजात मिल जाए। एक कॉलेज के बाहर चाय की थड़ी पर युवा बोले कि टूटी सडक़ों का तत्काल समाधान करना चाहिए, जमाना बदल गया परन्तु उदयपुर नहीं बदला। जब उनसे राजनीतिक दलों के बारे में पूछा तो कुछ बोले कि मोदी तो मोदी है, कुछ बोले अब राहुल गांधी भी बदलते दिख रहे हैं। वे यह भी बोले, अभी तो राजस्थान का माहौल पल-पल में बदलेगा....।
Updated on:
20 Oct 2018 02:12 pm
Published on:
20 Oct 2018 02:12 pm
