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चिकित्सा विभाग से नहीं संभल रही ‘राजश्री’ और अब इस अभियान को गिनीज बुक में लाने का दबाव

फ्लेगशिप योजनाओं में शामिल योजना की अनदेखी...

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rajshree yojna

उदयपुर . कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उद्देश्य से संचालित चिकित्सा विभाग की राजश्री योजना की दूसरी किस्त के भुगतान में लेटलतीफी बरती जा रही है। कमोबेश यह स्थिति पूरे प्रदेश में बनी हुई है। ऐसे में विभागीय मुखियाओं पर जहां योजना से संबंध‍ित भुगतान नियमित करने को लेकर निरंतर दबाव बढ़ रहा है, वहीं अब राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन की ओर से शुरू किए गए नए जागरूकता अभियान ‘डॉटर्स आर प्रीशियस’ को ‘गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज करवाने का भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
‘इधर कुआं, उधर खाई’ की कहावत में उलझे विभाग के मुखिया यह समझ नहीं पा रहे हैं कि वे पहले सरकार की राजश्री योजना संभालें या इस नए अभियान को। गौरतलब है कि जिले के प्रभारी सचिव सुबोध अग्रवाल ने शनिवार को उदयपुर यात्रा के दौरान राजश्री योजना में पिछड़े चिकित्सा विभाग के मुखिया को खरी-खोटी सुनाई थी।
संभाग में उदयपुर सबसे पीछे
राजश्री योजना के बकाया भुगतान केसेज की संख्या पर गौर करें तो संभाग के सभी जिलों में उदयपुर जिला सबसे पिछड़ा हुआ है। इस कड़ी में बांसवाड़ा दूसरे, चित्तौडगढ़़ तीसरे, डूंगरपुर चौथे, राजसमंद 5वें और प्रतापगढ़ 6 स्थान पर है।
यह योजना, वो अभियान
पहले तो समझने की जरूरत है कि राजश्री योजना है, जबकि डॉटर्स आर प्रीशियस एक अभियान है। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए यह जागरूकता अभियान है। राजश्री योजना मूल तौर पर महिला बाल विकास की योजना है।
नवीन जैन, निदेशक एवं शासन सचिव, एनएचएम

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राजश्री योजना: जिलेवार का बकाया भुगतान
जिला - बकाया केसेज
गंगानगर- 1115
बारां -1241
झालावाड -1247
झुंझुनूं -1614
जैसलमेर -1886
टोंक- 1899
हनुमानगढ -1899
प्रतापगढ़- 1988
धौलपुर -2053
बूंदी- 2342
राजसमंद -2432
सवाई माधोपुर- 2630
डूंगरपुर -2667
कोटा -2749
सिरोही- 2776
चित्तौडगढ़़- 2820
पाली -3047
बांसवाड़ा- 3198
दौसा- 3234
उदयपुर -3314
भीलवाड़ा -3441
सीकर -3591
जयपुर द्वितीय- 3592
अजमेर- 4233
करौली -4469
जालौर -4694
चूरू -4696
भरतपुर- 4851
नागौर -6394
बीकानेर -6586
बाड़मेर- 7081
अलवर- 7804
जोधपुर- 9236
जयपुर प्रथम- 10094