
jain saint vidyasager
उदयपुर. हुमड़ भवन में हुई धर्मसभा में सुमित्र सागर महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति करने वाला एक दिन स्वयं ही भगवान बन जाता है। भक्त की वाणी में भगवान की चर्चा ही होनी चाहिए। भगवान के भक्त बनना भिखारी नहीं। क्योंकि भक्त को बिना मांगे सब मिल जाता है और भिखारी को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती है। सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत ने बताया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर 108 सौधर्म इन्द्रों की ओर से चमत्कारिक सहस्रनाम विधान हुए। इसमें सुंदर मंडलों एवं भव्य समवशरण की रचना हुई।
देह व आत्मा का संबंध नहीं
आचार्य शिवमुनि के सान्निध्य में महाप्रज्ञ विहार में विशेष आत्मध्यान कराते हुए युवाचार्य महेन्द्र ऋषि ने कहा कि देह का और आत्मा का कोई सम्बन्ध नहीं है। देह बदलती रहती है। जन्म होता है, बचपन आता है, जवानी आती है और अन्त में बुढ़ापा और इसके बाद देह समाप्त। लेकिन, आत्मा कभी भी समाप्त नहीं होती। आत्मा जन्म-मृत्यु से परे है और अजर अमर है। हमारे शरीर में रोम-रोम में आत्मा विद्यमान है। चातुर्मास संयोजक वीरेंद्र डांगी ने बताया कि आचार्यश्री के दर्शन एवं मंगल आशीर्वाद लेने के लिए बेंगलुरु, सूरत और अहमदाबाद एवं अन्य जगहों से बड़ी संख्या में श्रावक पहुंचे।
ईश्वर को नजरंदाज कर होता है नुकसान
मुनि शास्त्र तिलक विजय ने कहा कि ईश्वर की कही गई बातों को नजरंदाज करना ठीक नहीं। ईश्वर का बताया हुआ मार्ग सच्चा एवं कल्याणकारी है। एक विषय विशेषज्ञ चिकित्सक की ओर से रोग के बारे में बताई गई बातों पर आंख मूंद कर विश्वास कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर की बात न माने तो नुकसान हमें ही होता है तो भगवान की बात नहीं मानने का नुकसान भी हमें ही है।
प्रतापगढ़ में होगा तपस्वी सम्मान समारोह
अखिल भारतीय दिगम्बर जैन दसा नरसिंहपुरा संस्थान उदयपुर की ओर से मध्यप्रदेश राज्य कांठल तरकाणी के 52 पंचायतों का महाअधिवेशन 21 अक्टूबर सोहन पैलेस, प्रतापगढ़ में होगा। इसमें ३२ व १० उपवास की तपस्या करने वाले तपस्वियों को सम्मानित किया जाएगा। ये जानकारी संस्थान के परम संरक्षक कुंतीलाल जैन ने दी।
जीवन पर ग्रहों का प्रभाव
आयड़ तीर्थ पर आचार्य यशोभद्र सूरिश्वर की निश्रा में बुधवार को ज्योतिष की कक्षा में जिज्ञासुओं को ग्रहों का फलादेश की जानकारी दी गई। आचार्यश्री ने प्रशिक्षुओं को जीवन में ग्रहों के पडऩे वाले प्रभाव की जानकारी दी।
गुणानुवाद सभा आयोजित
जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ के तत्वावधान में बुधवार को आराधना भवन में जितेंद्र सूरि की १३वीं पुण्यतिथि पर गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ। इस मौके पर पन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने गुणानुवाद सभा में कहा कि आचार्यश्री ने विचरण के माध्यम से कई जिनालयों का जीर्णोद्धार एवं निर्माण के लिए सदुपदेश दिया था। हमारा यह कर्तव्य है कि उनके उपकारों को याद रखें और उनके बताए मार्ग पर चलें। ज्ञान के समान दीपक नहीं
आयड़ वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान के तत्वावधान में ऋषभ भवन में मुनि प्रेमचंद ने धर्मसभा में कहा कि ज्ञान के समान अन्य कोई दीपक नहीं है, जो सारे अंधकार को सर्वांश से नष्ट कर सके। अज्ञान का विनाश कर दे।
Updated on:
11 Oct 2018 12:49 pm
Published on:
11 Oct 2018 12:49 pm
