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सेवानिवृत्ति आयु को लेकर चिकित्सा शिक्षकों का ‘बखेड़ा’, जयपुर में आरएमसीटीए के दो फाड़, उदयपुर में भी सुगबुगाहट

उदयपुर .सूचना ने उदयपुर में भी संगठन के पदाधिकारियों की धडकऩें बढ़ा दी।

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उदयपुर . जयपुर में रविवार को राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (आरएमसीटीए) के दो फाड़ होने की सूचना ने उदयपुर में भी संगठन के पदाधिकारियों की धडकऩें बढ़ा दी। इनमें नए संगठन को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

हालांकि किसी भी सदस्य के नए संगठन में शामिल होने की बात सामने नहीं आई है। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 करने एवं 62वें वर्ष में सभी प्रशासनिक पदों से छुट्टी के फैसले से खड़ा हुआ बखेड़ा अब सुर्खियों में है। सेवानिवृत्ति के कगार पर खड़े चिकित्सा शिक्षकों को यह स्वीकार नहीं हो रहा है कि पद पर रहने के बाद वे जूनियर चिकित्सक के अधीनस्थ किस तरह से कार्य करेंगे।

इसके चलते संगठन में वरिष्ठ चिकित्सकों एवं दूसरे क्रम में खड़े चिकित्सकों के बीच वैचारिक मतभेद बढ़ गया है। सुगबुगाहट के दौर में नए संगठन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। दूसरी ओर, मूल संगठन के पदाधिकारी अब तक कॉलेजवार संगठन को सक्रिय बनाने की तैयारियों में जुट गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह का विवाद फिर से नहीं दोहराया जाए।


बीच का रास्ता

आदेश की पालना में वरिष्ठ चिकित्सकों को नौकरी के अंतिम तीन साल में नए एचओडी, अधीक्षक एवं जूनियर स्तर पर आने वाले प्राचार्य के अधीन कार्य करना स्वीकार नहीं हो रहा है। वरिष्ठ एवं सेवानिवृत्त चिकित्सकों की राय है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में एचओडी पद पर रोटेशन की व्यवस्था लागू है यानी हर दो साल में एचओडी नया हो जाता है। इसी तर्ज पर जानकार अधीक्षक एवं प्राचार्य पद के लिए भी रोटेशन की मांग कर रहे हैं।


हमारे संगठन में किसी तरह के दो फाड़ की सुगबुगाहट नहीं है। जयपुर की घटना से सीख लेते हुए हम कॉलेज वार संगठन तय करने के बजाय राज्यव्यापी संगठन का रूप देकर अरिस्दा की तर्ज पर संगठन तैयार करने के बारे में जरूर विचार कर रहे हैं।
डॉ. राहुल जैन, सचिव, आरएमसीटीए उदयपुर