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हमने पिछोला को बचपन से देखा है, यहां क्रूज नहीं चाहिए

पिछोला झील

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सोशल मीडिया पर सवालों की बोछार, उदयपुर नगर निगम निशाने पर

सोशल मीडिया पर सवालों की बोछार, उदयपुर नगर निगम निशाने पर

उदयपुर. पिछोला झील को बचपन से देखा है। इस झील को दूधतलाई से देख ले या ऊंचाई से देखे कितनी सुंदर झील है लेकिन पूरे दृश्य में नावें व जेटियां ही दिखती है। अब यहां क्रूज लाकर क्या बताना चाहते है। छोटी सी झील में आलीशान क्रूज लाकर इस झील के स्वरूप, पारिस्थितिक तंत्र से लेकर शहर की लाइफ लाइन को खराब ही किया जा रहा है। हमे क्रूज नहीं चाहिए। शहर के पर्यटन विकास से लेकर तिजोरी भरने के दूसरे कई विकल्प हो सकते है लेकिन क्रूज नहीं चाहिए।

सहमति देने वाले उदयपुर के है तो अन्याय कर रहे

यह तो पूर्ण रूप से बिल्कुल गलत काम हो रहा है। हमने पिछोला को बचपन से देखा है, यह हमारी लाइफ लाइन है। उस समय झील का पानी की शुद्धता थी, बड़ी तादाद में मछलिया दिखती थी। आज झील नावों व जेटियों से भरी पड़ी है। पिछोला में क्रूज चलाने का मतलब सीधा सा है कि उदयपुर की सेहत खराब करनी है। जिन लोगों ने इसकी सहमति दी है और अगर वे उदयपुर के है तो वे इस शहर के साथ अन्याय कर रहे है। बिना किसी शर्म के इस फैसले को वापस लेना चाहिए।
- भंवर सेठ, अध्यक्ष अमर जैन साहित्य संस्थान

शहर नहीं चाहता फिर क्रूज क्यों
स्पष्ट है कि यह चीज नहीं होनी चाहिए। यह उदयपुर की छोटी सी पिछोला झील के लिए कतई ठीक नहीं है। इसके साइट इफेक्ट देखने चाहिए, इसमें पॉजिटिव से ज्यादा नेगेटिव बिन्दु है। शहर नहीं चाहता है तो फिर क्रूज क्यों? इस छोटी झील से ही शहर की प्यास बुझाई जा रही है, हमे इस झील को साफ रखने एवं शुद्ध पानी पीने के लिए यहां क्रूज नहीं चाहिए।
- सुधीर चित्तौड़ा, अध्यक्ष जैन जागृति सेंटर


झील का नैसर्गिक सौन्दर्य भी खराब होगा

पिछोला झील उदयपुर शहर के लिए पेयजल का मुख्य स्त्रोत है। स्वच्छ जल में क्रूज उतारने से दूषित जल आम जनता के स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा। जल में रहने वाले जीवों के लिए भी हानिकारक होगा। क्रूज से प्लास्टिक व अपशिष्ट वस्तुएं झीलों में गिरकर जलीय पर्यावरण को प्रदूषित करेगी जिसका हानिकारक परिणाम बाद में सामने दिखेंगे। इससे झील का नैसर्गिक सौन्दर्य भी खराब होगा, वर्तमान में विभिन्न जेटियों द्वारा वैसे झील क्षेत्र में अतिक्रमण हो रहा है, झील के अंदर कोई व्यावसायिक गतिविधियाँ नहीं होनी चाहिए।
- अभिषेक संचेती, प्रदेश महामंत्री-भारतीय जैन संघटना


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