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स्काउट की जंबूरी ने देश भर की जनजाति संस्कृतियों की मिटाई दूरी

scout guide राष्ट्रीय जनजाति स्काउट गाइड मिनी जबंूरी
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स्काउट की जंबूरी ने देश भर की जनजाति संस्कृतियों की मिटाई दूरी

स्काउट की जंबूरी ने देश भर की जनजाति संस्कृतियों की मिटाई दूरी

उदयपुर. scout guide महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के मौके पर राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड राज्य मुख्यालय के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय स्काउट गाइड मिनी जंबूरी के चौथे दिन देशभर के जनजाति समाज की ओर से सजाई गई झांकी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। अलग-अलग प्रदेशों से आए जनजाति स्काउट गाइड समूह ने कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रवार संस्कृति का प्रदर्शन किया। इससे पहले सुबह के आयोजन के दौरान अतिरिक्त जनजाति आयुक्त रामजीवन मीणा व अतिरिक्त जिला कलक्टर नरेश बुनकर की अध्यक्षता में ध्वजारोहण का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मीणा ने कहा कि मेवाड़ का इतिहास गवा ह है कि यहां के जनजाति वीरों, खिलाडिय़ों एवं सामाजिक उत्थान से जुड़े गुरू गोविन्द, मावजी महाराज, काली बाई, नानाबाई खंाट, राणा पूंजा, लिम्बा राम ने उदयपुर संभाग का नाम रोशन किया है। इसी प्रकार मैं आप जनजाति स्काउट गाइड बालक बालिकाओं से आह्वान करता कि अपने मानस पटल पर यह अंकित करें कि भविष्य में क्या करना है और आज से ही उस ओर अग्रसर होने का प्रयास करें। एडीएम बुनकर ने कहा कि स्काउट का नाम ही अनुशासन है। अनुशासन का नाम ही स्काउट है। दिमाग का अनुशासन, गतिविधियों का अनुशासन, भावनाओं का अनुशासन, विचारों का अनुशासन ही स्काउट का ध्येय है। इसी प्रकार शाम के समय आयोजित कार्यक्रम को बतौर अतिथि जनजाति परियोजना अधिकारी गितेश मालवीय व सेवानिवृत्त आइपीएस सुरेशचंद्र पण्ड्या ने स्काउट को संबोधित किया।
शिविर संचालक गोपाराम माली, मण्डल सचिव सुरेशचन्द्र खटीक ने आगन्तुकों का स्वागत किया। गोहाटी जनजाति गीत पर सभी राज्यों के 351 स्काउट्स गाइड्स ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर सभी को आकर्षित किया।

चर्चा में रही ये प्रस्तुतियां
प्रतियोगिता में हरियाणा ने शादी का दृश्य, मध्यप्रदेश ने आदिवासी जीवन शैली, महाराष्ट्र ने गणपति पूजा की झांकी प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। गोहाटी से आऐ एनएफ रेलवे के संभागियों ने बाग बीहू को झांकी माध्यम से प्रदर्शित किया। उत्तर प्रदेश ने वहां के मुख्य त्यौहार छठ पूजा व महोत्सव की संस्कृति, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार ने भी जनजाति संस्कृति को झांकी के माध्यम से स्थान दिया। scout guide प्रतापगढ़ ने गौतमेश्वर महादेव मेला, बांसवाड़ा ने गवरी एवं जनजाति नृत्य, सिरोही ने राष्ट्रीय एकता अखण्डता के साथ बाबाराम देव की सवारी, बारां जिले ने आदिवासी सहरिया नृत्य से सभी को झूमने पर मजबूर किया।