
उदयपुर में 75 जवानों ने सीखी तैराकी, अब कर रहे आपात स्थितियों में मदद.. लिया वाटर मैनशिप का प्रशिक्षण
धीरेंद्र जोशी/उदयपुर. मेवाड़-वागड़ में छलकने वाली झीलेंं, तालाब और जलाशय की लहरें लोगों के मन को आच्छादित करती हैंं, वहीं इनमें होने वाले हादसों के लिए भी हमारे पास 75 जवानों की ऐसी टीम खड़ी है जो किसी भी आपात स्थिति में तत्काल बचाव कर लोगों को राहत दे रही है। इस टीम की खासियत यह है कि यह गहरे से गहरे पानी में भी आपात परिस्थितियों में रेस्क्यू कर सकती है। इस टीम को गत दो वर्ष से आरसीए के तरणताल में नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
झीलों की नगरी होने के बावजूद शहर में दो वर्ष पूर्व तक सरकारी स्तर पर अतिवृष्टि के समय बचाव और गहरे पानी में डूबे लोगों को निकालने के लिए कोई टीम नहीं थी। किसी के डूबने की स्थिति में निजी तैराकों की मदद से शवों को बाहर निकाला जाता था। लेकिन वर्ष-2017 में राज्य आपदा प्रतिसाद बल (एसडीआरएफ) और राज्य आपदा, नागरिक सुरक्षा, बचाव दल (सिविल डिफेंस) के अधिकारियों ने अपने जवानों को तैराकी में सक्षम बनाने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने आरसीए के तरण ताल में संपर्क किया। यह तरणताल बालाजी तैराकी संस्थान ने अनुबंध पर लिया हुआ है। इसके प्रशिक्षक पीयूूष सुखवाल ने जवानों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देने की सहमति प्रदान की। इसके बाद यहां 75 जवानों ने एक माह तक तैराकी प्रशिक्षण लिया। करीब एक माह तक प्रशिक्षण लेने के बाद जवानों ने फतहसागर में अभ्यास करना शुरू कर दिया। ये जवान समय-समय पर तरणताल पर आते हैं। यहां रिहर्सल, डेमो के साथ ही तैराकी के गुर भी सीखते हैं। वर्ष 2018 में 55 जवानों ने 10 का प्रशिक्षण लिया।
शहर के बीच में मिली सुविधा
एसडीआरएफ के कंपनी कमांडर राकेश कुमार ने बताया कि शहर के बीच में आरसीए के तरणताल में गत दो वर्ष से जवानों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले जवान बड़े शहरों में जाकर स्कूबा डाइविंग और अन्य प्रकार के प्रशिक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं। हमने वर्ष 2017 में छह शव गहरे पानी से निकाले। एक माह पूर्व जयसमंद झील में डूबे बांसवाड़ा जिले के युवक का शव करीब 50 फीट गहराई से निकाला। इसके साथ संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए हमारे जवान तैनात किए जा रहे हैं।
ऐसी सुविधा मिलना मुश्किल
सिविल डिफेंस के डिप्टी कंट्रोलर अमित शर्मा ने बताया कि सिविल डिफेंस ऑफिस जब वर्ष-2017 में शुरू हुआ तो हमारे पास हमारे पास ऐसा कोई पुल नहीं था। जहां हम अपने वालंटियर को प्रशिक्षण दिला पाते। ऐसे में बालाजी तैराकी संस्थान की ओर से आरसीए नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया गया। संस्थान के प्रशिक्षक पियुष सुखवाल ने एक अच्छे प्रशिक्षक के तौर पर हमारे वालंटियर को अच्छा प्रशिक्षण दिया। यहां तक कि फतहसागर में अभ्यास के दौरान भी उन्होंने जवानों को सहयोग दिया और आज भी आवश्यकता पडऩे पर वे हमेशा तैयार रहते हैं।
लिया वाटर मैनशिप का प्रशिक्षण
तैराकी सीखने के बाद विपुल चौधरी ने आंध्रप्रदेश और गौरव बागोरा ने नागपुर से वाटर मैनशिप का डिप्लोमा वर्ष 2017 में किया। इस वर्ष हेमंत कुमार और अन्य जवान सितंबर माह में यह डिप्लोमा करने बैंगलुरू जाएंगे।
गौरवांवित महसूस करता हूं
बालाजी तैराकी संस्थान के प्रशिक्षक पियुष सुखवाल ने बताया कि एसआरडीएफ और सिविल डिफेंस के जवानों को प्रशिक्षण देकर हमारा संस्थान गौरवांवित महसूस कर रहा है। इस प्रशिक्षण से हमने भी संभाग और जिले के लोगों के लिए कुछ किया यह हमारे लिए गौरव की बात है।
Published on:
11 Aug 2018 04:06 pm
