
श्रीराम कथा का आयोजन : पोथी कलश के साथ श्रीराममय हुआ सीता वात्सल्य धाम
उदयपुर. सुखेर क्षेत्र स्थित निराश्रित बाल सेवा गृह, जीवन ज्योति छात्रावास (सीता वातसल्य धाम) में बुधवार को श्रीराम कथा का आयोजन धूमधाम से हुआ। पुष्करना भट्ट परिवार की ओर से आयोजित कथा में साध्वी अखिलेश्वरी देवी ने राम कथा से पहले कलश पोथी धारण करने, कथा श्रवण व सत्संग का महत्व बताया। साध्वी ने कहा कि पोथी और कलश सिर पर लेने का अर्थ धार्मिक कार्य नहीं होकर ऐसे सत्य संकल्प को धारण करना है, जिसमें अच्छे कार्य को मन, एकर्म, वचन से पूरा करने का प्रण है। श्रीराम चरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय देते हुए साध्वी ने कहा कि भगवान श्रीराम, तुलसीदास के आराध्य देव थे। उन्होंने राम के संपूर्ण जीवन को इसमें अभिव्यक्त किया है। सनातन धर्म के लेखक तुलसीदास ने शुरुआत में श्रीराम के साथ भगवान शिव व पार्वती की कथा सुनाई। बताया कि कथा पूरी होने से पहले माता पार्वती को नींद आ गई, लेकिन वहां बैठे कौए ने पूरी कथा सुन ली। उसी पक्षी का पुर्नजन्म कागभुशुण्डि के तौर पर हुआ। कागभुशुण्डि ने ये कथा गुरुड़ को सुनाई। नौ दिवसीय कथा का आयोजन प्रतिदिन सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक होगा।
Updated on:
11 Oct 2018 01:14 pm
Published on:
11 Oct 2018 12:34 pm
