
मधुसूदन शर्मा
Success Story: जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिज़ूल है कद आसमान का। ये किसी शेर की चंद लाइनें जरूर हैं, लेकिन जिंदगी का फलसफा सिखाने वालों के किरदार पर एकदम सटीक बैठती है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे किरदार की है, जो शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद अपने हौसले के बूते सफलता की इबारत लिख रहा है। जिसने बकरियां चराई, तालाब में तैरना सीखा और अब अपने जैसे कई युवाओं के लिए रोशनी की किरण बन गया।
भीलवाड़ा जिले के गांव भाव का गुड़ा में जन्मे जमनालाल बलाई (32) ने गांव में ही प्रारंभिक शिक्षा ली। फिर पास ही के गांव खोहरा कला के राउप्रावि में पढ़ाई की। परिवार की माली हालत ऐसी थी कि स्कूल से लौटने के बाद बकरियां चराई। जन्म से ही दायां हाथ पूरा नहीं था, लेकिन इच्छा शक्ति के बल पर गांव के तालाब में कूदा और हाथ-पैर मारने शुरू कर दिए। आज वे उदयपुर के खेल गांव में तैराकी के प्रशिक्षक हैं और खुद भी सुबह-शाम चार घंटे अभ्यास करते हैं।
2020 में उदयपुर में रखा कदम
जमनालाल की स्वीमिंग सीखने की ललक इतनी बढ़ गई कि 2020 में उन्होंने उदयपुर की ओर रुख किया और स्वीमिंग कोच महेश पालीवाल से मिले। पालीवाल ने जमनालाल में संभावनाएं देख उनको तराशना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वह तैरने में इतने पारंगत हो गए कि कई पदक जीतकर उदयपुर और प्रदेश का नाम रोशन करने लगे।
गिनीज व लिम्का बुक में रेकॉर्ड दर्ज
गुजरात के गोधरा में 2017 में हुई भारतीय पैरा रिले टीम में लगातार 120 घंटे तैरकर विश्व रेकॉर्ड बनाया। इसमें जमनालाल का नाम भी शामिल है। ये रेकॉर्ड गिनीज बुक और लिम्का बुक में दर्ज है।
राज्य स्तर पर जीते कई पदक
- 2020 में जोधपुर में राज्यस्तरीय पैरा स्वीमिंग में दो रजत पदक जीते
- 2021 में जोधपुर में हुई राज्यस्तरीय पैरा स्वीमिंग में तीन स्वर्ण पदक
- 2022 में जोधपुर में राज्यस्तरीय पैरा स्वीमिंग में तीन स्वर्ण पदक
राष्ट्रीय स्तर पर जीता सोना
- 2018 में पोरबंदर के समुद्र में ओपन पैरा स्वीमिंग प्रतियोगिता में पांच किमी सफर तय किया और देश में टॉप टेन रैंक हासिल की।
- 2022 में आसाम के गुवाहाटी में नेशनल चैंपियनशिप में सौ मीटर बटर फ्लाई स्ट्रोक में कांस्य पदक जीता
Published on:
12 Jan 2024 09:30 am
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