
मां—बाप दिहाड़ी मजदूर और बेटे ने अभावों में भी साबित की अपनी काबिलियत
राकेश शर्मा राजदीप/उदयपुर . यों तो देश-दुनिया में कमोबेश हर क्षेत्र में कहीं जन्मजात प्रतिभा के बूते तो कहीं अपने लगन के दम पर हुनरमंदों ने अलहदा मुकाम हासिल किए हैं, लेकिन कई बार अभावों के बीच संघर्ष की आग में तपकर कुंदन की तरह निखरे हैं ‘गुदड़ी के लाल’ भी। वहीं, इन्हें खास पहचान दिलाने और भीड़ से अलग मजबूती से खड़ा करने में ऐसे प्रशिक्षकों का योगदान भी भूला नहीं जा सकता जिन्होंने तन-मन-धन और श्रम समर्पित करके सबके सामने एक मिसाल कायम की है। पत्रिका प्लस आज कुछ ऐसी ही खेल प्रतिभाओं और खेल गुरुओं से साक्षात्कार करा रहा है जिन्होंने समय की धारा के विपरीत बहकर न केवल कामयाबी की मंजिल पाई अपितु समर्पण के जज्बे से सेवा का नया अध्याय लिखा है।
मजदूर का बेटे ने पाया सिल्वर
उदयपुर शहर से 25 किलोमीटर दूर डोडावली ग्राम पंचायत पिपलिया के जनजाति बालक मुकेश मीणा ने गत वर्ष रांची (झारखण्ड) में आयोजित स्कूल नेशनल सब जूनियर जूडो प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल प्राप्त कर पूरे देश मे दूसरा स्थान प्राप्त किया। बता दें कि मुकेश की इस उपलब्धि पर केंद्र सरकार की खेलो इण्डिया योजना में उसका चयन हुआ है। जिसके अंतर्गत मुकेश को गुजरात के नडियाद जूडो सेंटर पर प्रवेश मिला। जहां वह जूडो के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक सतपाल सिंह राणा एवम घनश्याम ठाकुर से नियमित प्रशिक्षण पाएगा। इतना ही नहीं, पढ़ाई-लिखाई और प्रतिदिन डाइट का लगभग प्रति वर्ष पांच लाख रुपए खर्चा केंद्र सरकार वहन करेगी। मकसद महज इतना है कि मुकेश को अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए तैयार किया जा सके। गौरतलब है कि उभेश्वरजी की पहाड़ी के पास बसे पिपलियाजी एक अभावग्रस्त क्षेत्र है। जहां बिजली-पानी और सडक़ जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं है। मुकेश के माता पिता शहर में रोज दिहाड़ी मजदूरी करने आते हैं। इसी गांव से मुकेश ने प्राथमिक शिक्षा के बाद उदयपुर के रेलवे ट्रेनिंग स्कूल में प्रवेश लेकर मधुबन स्थित जनजाति खेल छात्रावास में रहते हुए शारीरिक किशन सोनी से जूडो का प्रशिक्षण प्राप्त किया। जो मुकेश को सज्जन नगर जूडो सेंटर पर नियमित नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया करते थे। उल्लेखनीय है कि किशन ने खेल गुरु सुशील सेन से प्रशिक्षण पाया था।
ये बने हैं खेलगुरु के रूप में मिसाल
सरकारी स्कूल के शारीरिक शिक्षक सुशील सेन साल 1998 से नेला ग्राम सहित अम्बामाता और मावली में निरन्तरं सेवाएं देते हुए वर्तमान में राउप्राविद्यालय, पानेरियो की मादड़ी में कार्यरत है। सुशील नियमित रूप से विद्यालय समय के बाद शहर और गांवों के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क जूडो प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई-लिखाई-ट्रेनिंग और नौकरी तक का मार्गदर्शन करते हैं। गौरतलब है कि सुशील ने आज तक शहर में कई सरकारी शारीरिक शिक्षकऔर कई राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी दिए हैं। इनके द्वारा प्रशिक्षित कई छात्र-छात्राएं सरकारी स्कूलों में पीटीआई बने हैं। जिनमें दो छात्राएं पुलिस विभाग, एक होमगार्ड और एक बैंक में कार्यरत हैं। हाल ही में तीन छात्र-छात्राओं का चयन शारीरिक शिक्षक के लिए हुआ है। सुशील सेन के निर्देशन में तीन छात्राए वर्तमान में बीपीएड की ट्रेनिंग कर रही है।
Updated on:
22 Jul 2019 07:06 pm
Published on:
22 Jul 2019 05:44 pm
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