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उदयपुर में जल्द बदलेगी चिकित्सा की तस्वीर, डेढ़ सौ करोड़ के प्रोजेक्ट का कार्य अंतिम चरण में

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उदयपुर में जल्द बदलेगी चिकित्सा की तस्वीर, डेढ़ सौ करोड़ के प्रोजेक्ट का कार्य अंतिम चरण में

भुवनेश पंड्या/ उदयपुर . उदयपुर में सितम्बर से चिकित्सा की तस्वीर बदल जाएगी क्योंकि महाराणा भूपाल चिकित्सालय परिसर के प्रवेश द्वार के समीप तैयार हो रहा सुपर स्पेशलिटी सेन्टर शुरू हो जाएगा। डेढ़ सौ करोड़ रुपए की लागत वाले इस केन्द्र में 120 करोड़ रुपए केन्द्र व 30 करोड़ रुपए राज्य सरकार लगा रही है। नई तकनीकी चिकित्सा और हर बीमारी के उपचार के लिए केन्द्र सात मंजिला भवन में शुरू होने जा रहा है।

आरएनटी के उपाचार्य डॉ ललित कुमार रेगर ने बताया कि कुल 11 विभाग यहां पर चलाए जाएंगे, जिसमें रेडियोथैरेपी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, यूरो मेडिसिन, प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, एण्डोक्राइनोलॉजी शामिल हैं। सभी विभागों में तीन-तीन चिकित्सकों की टीम बतौर यूनिट कार्य करेगी। ऐसे में उदयपुर को विभिन्न विभागों के करीब 15 चिकित्सक नए मिलेंगे। इसका प्रस्ताव बनाकर आरएनटी मेडिकल ने राज्य सरकार को सौंप दिया है।


यूरोलॉजी
यूरोलॉजी विभाग के डॉ सुनील गोखरू ने बताया कि सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू होने से काफी लाभ होगा। इसमें बगैर ऑपरेशन के किडनी के अन्दर के पत्थर हटाने की मशीन लिथुट्रिप्सी लगेगी। यह मशीन करीब पांच करोड़ रुपए की कीमत की है जिससे मरीजों को बहुत लाभ होगा। करीब एक करोड़ की लेजर मशीन लगाई जाएगी जिससे किडनी स्टोन को ऑपरेशन के दौरान ही पाउडर बनाकर आसानी से निकाला जा सकेगा। साथ ही जांच के लिए कई आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी।

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चिकित्सा सेवाओं में यह होगा विस्तार
नेफ्रोलॉजी
डॉ मुकेश बडजात्या ने बताया कि यूरो ट्रांसप्लान्ट यूनिट बोला जाएगा। इसमें गुर्दा प्रत्यारोपण हो सकेगा। इसमें यूरोलॉजिस्ट आने से पूरा यूरोलॉजी विभाग बनेगा, थियेटर अलग से बनेगा। गुर्दे ट्रांसप्लान्ट के लिए दानदाता तैयार है, डायलिसिस व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। गुर्दे बदलवाने के लिए प्रति माह करीब दो मरीज जयपुर जाते हैं, जिन्हें अब जयपुर नहीं जाना होगा। एक मरीज जिसकी किडऩी बदली जाएगी, वह जीवन भर नेफ्रोलॉजी विभाग देखता है।

एण्डोक्राइनोलॉजी
डॉ संदीप कंसारा ने बताया कि कई प्रकार की नई सुविधाएं हो जाएगी। इसमें वार्ड बेहतर होंगे ओर जांचों भी सुलभ हो जाएगी। करीब 40 लाख रुपए की लागत की डेक्सा मशीन लगेगी, जो हड्डियों की सघनता नापने के काम आएगी। 10 लाख रुपए का फंडस कैमरा लगेगा, जो आंत का पर्दा देख सकेगा। खास तौर पर डायबिटिज जांच के लिए न्यूरोपैथी मशीन व खून की नलियों से जुड़ी पूरी जांच के लिए डॉपलर मशीन लगाया जाएगा। साथ ही एक शरीर की लम्बाई व ऊंचाई के आधार पर उसका भार कितना हो, यह जानकारी मिल सकेगी। कई रिसर्च टूल्स मिलेंगे, भविष्य में इसका लाभ मिलेगा।


यह भी होगा
मस्तिष्क की बारीक से बारीक जांच हो सकेगी, जैसे एंजियोग्राफी होती है, इसी तरह मस्तिष्क जांच हो सकेगी।
&प्रयास कर रहे है कि सितम्बर तक सेन्टर शुरू हो जाए, काम तेजी से चलाया जा रहा है। केन्द्र शुरू होने के साथ ही मरीजों को निजी चिकित्सालयों की दौड़ नहीं लगानी होगी।
डॉ डीपी सिंह, प्राचार्य आरएनटी


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