
अध्ंारे में जगी उम्मीद की 'किरणÓ
उदयपुर/ झाड़ोल. जनजाति बाहुल्य झाड़ोल उपखण्ड क्षेत्र में स्वयं सेवी संस्था की ओर से बच्चों को पढ़ाने के लिए जारी प्रयास रंग ला रहे हैं। इस वर्ष के परीक्षा परिणामों में संस्था के अधीन पढऩे वाले बच्चों का परिणाम 93.33 प्रतिशत रहा है। वह भी ऐसे बच्चों को जिन्होंने 2 से 5 साल पहले स्कूल जाना बंद कर दिया था। संस्था प्रतिनिधियों की इस मेहनत ने राजकीय स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता की पोल खोल कर रख दी है। मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी जहां क्षेत्र के राजकीय विद्यालयों में सेवारत शिक्षक परिणाम नहीं दे रहे वहीं स्वयं सेवी संस्थान के प्रयासों ने गरीब बच्चों के भविष्य को लेकर उम्मीद की नई किरण जगाई है। हकीकत देखें तो सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम 20 से 60 फीसदी रहा है। वहीं बीते 6 साल से सक्रिय स्वयं सेवी संस्थान प्रथम राजस्थान के महज 6 विषय अध्यापकों ने 7 अलग-अलग पंचायतों में उनके केंद्रों पर 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के कुल 120 जनों को इस वर्ष १०वीं कक्षा की तैयारी कराई। प्रत्येंक केन्द्र पर एक प्रभारी के माध्यम से हर रोज दो से 4 घंटे का अध्ययन कराया गया। इनमें से ११२ परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। इनमें 97 लड़कियां व 15 लड़के शामिल हैं।
12 जनों की सफलता
संस्था के 12 कार्यकर्ता की टीम लगातार सफलता दिलवा रही हैं। इस टीम में ब्लॉक समन्वयक रवींद्र कुमार 5 फैकल्टी, सुनील मेघवाल, भूपेन्द्र सिंह, लोकेश गुर्जर, संजय लोहार, भगवती नागर 6 टीचर्स निर्मला लोहार, जशोदा लोहार, किरण पटेल,भानुप्रिया राणावत, रमेश जोशी व कुलदीप पूर्बिया शामिल हैं।
बीते छह साल की मेहनत
सत्र... नामांकित विद्यार्थी.... उत्तीर्ण विद्यार्थी.... प्रतिशत...नियमित
2013-14... 140... 80... 57.1.... 63
2014-15... 134... 114... 84.07.... 88
2015-16... 91... 86... 94.5... 70
2016-17.... 80.... 79.... 98.००.... 75
2017-18.... 103.... 98.... 96.००.... 14
2018-19.... 120.... 112... 93.33.... 120
वर्ष 2011 में 5वीं फेल होकर छोड़ी पढ़ाई
झाड़ोल में रहने वाली रूषा खराड़ी वर्ष 2011 में 5वीं फेल हो गई थी। खराब स्वास्थ्य के बीच उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। संस्था के प्रयासों के बीच रूषा ने एकबारगी आगे पढऩे से मना किया। बाद में रूषा के पिता मांगीलाल व पत्नी के सहयोग से रूषा पढऩे को राजी हुई। प्रतिदिन ३ किमी पैदल चलकर अदकालिया केन्द्र पर उसने नियमित अध्ययन किया। और परिणाम सामने है।
इसी तरह केंद्र से 11 किमी दूर बड़ोलिया गांव निवासी रंजिता के बचपन में मां की मौत के बाद उसने हॉस्टल में रहकर 10वीं तक पढ़ाई की, लेकिन १०वीं फेल हो गई। पढ़ाई के चार वर्ष बाद स्वयं सेवी संस्था प्रतिनिधियों से मिलकर पढ़ाई शुरू की। वह प्रतिदिन पैदल वाघपुरा केंद्र पहुंचकर पढ़ाई करती और वर्ष 2018-19 के नतीजों में उसने परीक्षा उत्तीर्ण की।
Published on:
10 Jun 2019 06:00 am
