
उदयपुर। लेकसिटी उदयपुर को प्रदेश के पहले वेटलैंड सिटी के रूप में मिली अन्तरराष्ट्रीय मान्यता न केवल शहर की झीलों बल्कि विरासत और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी अहम होगी। यह तमगा शहर के समूचे पर्यावरण व जैव विविधता की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।
रामसर कन्वेशन की ओर से इस घोषणा के साथ ही विश्वभर में झीलों के शहर के नाम से मशहूर उदयपुर का दर्जा वैश्विक स्तर पर और बढ़ गया है। यह दर्जा एक तरह का अन्तरराष्ट्रीय सम्मान है, जो देश में पहली बार उदयपुर और इन्दौर को एकसाथ प्राप्त हुआ है।
अब शहर के वेटलैंड सिटी बनने से पिछोला एवं फतह सागर सहित सभी झीलों का संरक्षण वेटलैंड नियमों के मुताबिक होगा। रामसर कन्वेशन की गाइड लाइन के अनुसार किसी भी शहर को वेटलैंड सिटी में शामिल करने के लिए वहां कोई मेजर वेटलैंड होना जरूरी है।
वेटलैंड सिटी के रूप में उदयपुर के दावे को मजबूत करने के लिए मेनार को मेजर वेटलैंड के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही यहां की जल संरक्षण की परम्पराओं और सांस्कृतिक परिवेश का भी वेटलैंड सिटी के रूप में नामित होने के लिए महत्वपूर्ण रहा।
अब वेटलैंड संरक्षण को लेकर रामसर के नियमों को ध्यान में रखते हुए शहर में जलस्रोतों और विरासत के संरक्षण के कार्य होंगे तथा इसी के अनुरूप आजीविका के स्रोत तैयार करते हुए गरीबी को दूर करने जैसे कार्य होंगे। विकास का समूचा मॉडल पर्यावरण अनुकूल होगा।
वेटलैंड के रूप में नामित होने वाले जलस्रोतों के लिए सरकार की ओर से नियम बनाएं हुए हैं। इसके तहत वेटलैंड (आर्द्रभूमि) का प्रबंधन और संरक्षण किया जाता है। इन नियमों के तहत आर्द्रभूमि क्षेत्रों के भीतर कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध होता है। जिसमें औद्योगिकीकरण, खतरनाक पदार्थों का निपटान, ठोस अपशिष्ट का निपटान आदि शामिल हैं।
नियमों में कुछ ऐसी गतिविधियां शामिल है। जिन्हें संबंधित प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बाद ही किया जाना है। इनमें आर्द्रभूमि से पानी निकालना, सजीव और निर्जीव संसाधनों का दोहन आदि शामिल हैं। निगरानी राज्य एवं केंद्र सरकार के स्तर पर की जाती है।
जलस्रोत
● जल शुद्धिकरण
● जल प्रवाह तंत्र विकास
● अपशिष्ट जल उपचार
● कार्बन उर्त्सजन में कमी
● बाढ़ और आग जैसी आपदा की संभवना में कमी लाना
● शहरी गर्मी शमन
● प्राकृतिक स्रोतों का संरक्षण
● जल आपूर्ति
● कृषि से आजीविका
उदयपुर की झीलों की सुरक्षा के मुद्दों को राजस्थान पत्रिका की ओर लगातार उठाया जाता रहा है। पत्रिका की खबरों के बाद झीलों की सुरक्षा के मामले न्यायालय में भी पहुंचे। इसमें हाईकोर्ट की ओर से उदयपुर की पिछोला एवं फतह सागर झील से पेट्रोल डीजल संचालित नावों को बाहर कर ईको फ्रेंडली नावों के संचालन का फैसला महत्वपूर्ण रहा। इसके बाद नगर निगम और यूडीए की ओर से दोनों झीलों से पेट्रोल-डीजल संचालित नावों को बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू की।
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने राज्य के 44 वेटलैंड के लिए अंतिम अधिसूचना जारी की थी। इसमें उदयपुर जिले के बर्ड विलेज मेनार के नाम पर भी अंतिम मुहर लगी थी। विभाग ने मेनार वेटलैंड के संरक्षण पर कार्य भी शुरू किया है। वेटलैंड की अधिसूचना में मेनार के जलाशयों को मेनार तालाब वेटलैंड कॉम्प्लेक्स नाम दिया गया है।
उदयपुर को वेटलैंड सिटी के रूप में नामित किया जाना हमारे के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे झीलों के शहर को अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई है। वेटलैंड सिटी का दर्जा प्राप्त होने के बाद झीलों का संरक्षण हो सकेगा।
उनकी जैव विविधता बनी रहेगी और कैचमेंट एरिया सुधरेंगे। हम यह मांग 1997-98 से उठाते आ रहे हैं। अब सरकार की और नागरिकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे इस सम्मान को बनाएं रखें।
-अनिल मेहता, पर्यावरणविद्
Updated on:
27 Jan 2025 11:32 am
Published on:
27 Jan 2025 10:15 am
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