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वाह से घोटालेबाज! 10 साल बाद जिन्होंने भूखंड खरीदे, उन्हें पट्टों में बता रखा पड़ोसी

वाह से घोटालेबाज! 10 साल बाद जिन्होंने भूखंड खरीदे, उन्हें पट्टों में बता रखा पड़ोसी
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मोहम्मद इलियास/उदयपुर
ग्राम पंचायत भुवाणा में चरनोट व बिलानाम भूमि के फर्जी पट्टे जारी करने के प्रकरण में कई ऐसी खामियां सामने आई जिसमें खुद जिला प्रशासन व एसीबी टीम चकरघिन्नी हो गई। आरोपियों ने पट्टों में हेराफेरी कर चालू वित्तीय वर्ष में कटी रसीदों में मनमाफिक क्रमांक डाल दिए, जिनका पंचायत में कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। इतना ही नहीं, जिन्होंने पट्टे के आधार पर दस से बारह साल बाद भूखंड खरीदे उन्हें भी बेकडेट में बनाए पट्टों में पड़ोसी बता दिया गया। और तो और शहर में रहने वाले लोगों व खाद्य सुरक्षा प्राप्त परिवारों को भुवाणा का निवासी बताकर पट्टे बनाए गए।गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने 16 नवम्बर के अंक में ‘बेशकीमती जमीन के जारी हुए फर्जी पट्टे, राजकीय अवकाश में भी कटी रसीदें’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में एसीबी ने जांच में जुटते हुए परिवाद दर्ज करने के लिए मुख्यालय भिजवाया।
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यह था मामला
आरोपियों ने इन पट्टों का निर्माण वर्ष 2000 से 2005 के बीच बताकर नियम विरुद्ध 10 साल बाद कंफर्मेशन डीड जारी र्की, जबकि अंकेक्षण रिपोर्ट में इनका हवाला ही नहीं है। बड़ी बात तो यह है कि पट्टे मनमाफिक क्रम से रसीद भी छुट्टी वाले दिनों में काटी गई, जिनका पट्टा जारी हुआ वह बेशकीमती भूमि होकर भुवाणा-प्रतापनगर बाइपास व सौ फीट रोड मीरानगर के आसपास क्षेत्र की बताई गई है। पंजीयन कार्यालय से दस्तावेज एवं अंकेक्षण ऑडिट रिपोर्ट के बाद एक आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रशासन व एसीबी को दस्तावेज उपलब्ध करवाते हुए शिकायत की। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि गड़बडिय़ां के संबंध ऑडिट रिपोर्ट में कई तरह के खुलासे हुए है।