
ये है ऐसे शातिर चोर, खुद के गांव में इज्जतदार, बाहर निकलकर लोगों को कर रहे कंगाल
ये है ऐसे शातिर चोर, खुद के गांव में इज्जतदार, बाहर निकलकर लोगों को कर रहे कंगाल
मोहम्मद इलियास/उदयपुर
देशभर में करीब 350 से ज्यादा चोरी करने वाले गिरोह के सदस्यों ने पिछले एक साल में कई परिवारों को कंगाल कर अपने घर भर लिए। सरगना शहजाद के अलावा हर कोई जल्द अमीर बनने की चाहत में गैंग में शामिल हुआ। सभी आरोपी गांव में इज्जतदार है, इनकी गिरफ्तारी पर गांव में किसी को विश्वास भी नहीं हो पा रहा। एक आरोपी तो लखनऊ में कानून की किताबें बेचता हुआ कानूनी तोडऩा सीख गया। एक साल में इन आरोपियों ने फ्लेट के ही इतने ताले तोड़े कि इन्हें कुछ तो याद भी नहीं है।
एसपी कैलाशचन्द्र विश्नोई ने बताया कि आरोपियों को पकडऩे में हिरणमगरी थाने के हेडकांस्टेबल विक्रम सिंह व कांस्टेबल उपेन्द्र की महत्ती भूमिका रही। उन्होंने हिरणमगरी में 26 नवम्बर को एक कॉम्पलेक्स में वारदात के बाद आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला तो उन्हें आरोपियों की कार के फुटेज मिले। नजर रखी तो वहीं कार अगले दिन हिरणमगरी में ही दिख गई। पुलिसकर्मियों ने पीछा कर कार को रोका तो आरोपियों ने गुमराह किया। एक ने बीमारी का हवाला देते हुए इतना कह दिया कि उसके 95 प्रतिशत हार्ट में ब्लाकेज है। परेशान मत करो, कुछ हो गया तो आप जिम्मेदार होंगे। आरोपियों की बातों पर हेडकांस्टेबल को शक हो गया। उसने सीआई डॉ. हनवंतङ्क्षसह को सूचना दी। उन्होंने आरोपियों को थाने लाकर पूछताछ की तो चोरियों का खुलासा हो गया।
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सीखा फिर बनाई गैंग
एएसपी गोपालस्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि आरोपियों में सरगना शहजाद मेरठ में पहले मुल्ला शकीर व इरशाद की गैंग में काम करता था। जब वह इसमें अभ्यस्त हो गया तो उसने एक साल पहले नई गैंग बनाई। आरोपी जुबेर, अजहर व सरफराज को माल में कुछ हिस्सा देकर शामिल किया। जुबेर पूर्व में लखनऊ में कानूनी किताबें बेचता था, लेकिन उसमें कम कमाई होने से वह शहजाद के साथ जुड़ गया। उसने चोरी के पैसे अपने घर के काम में लगा दिए। शहजाद ने मकान बनाया तो कई अय्याशियां की। सरफराज ने हाल में ही अपनी पुत्री का विवाह रचाया तथा मकान की रिपेयरिंग पर खर्चा कर दिया। अजहर ने अपनी कर्जा उतारा।
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शातिर ऐसे की कोई सुराग नहीं छोड़ा
आरोपी इतने शातिर हैं कि वे वारदात के लिए हाथों में दस्ताने पहनते तो मोबाइल को स्वीच ऑफ रखते थे। कॉम्पलेक्स में ऊपरी माला ही उनका टारगेट रहता था। जिस फ्लेट में ऊपर से ताला लगा होता उसमें वे सबसे पहले वारदात करते थे। जिनमें इंटरलॉक होता वहां पर वे दो से तीन बार बेल बजाते थे। कोई नहीं आता तो इंटरलॉक को तोडकऱ अंदर घुस जाते, जहां पर जो आ जाता तो वे अपनी पास मौजूद किसी डॉक्टर के बारे में पूछ लेते थे। फ्लेट में ही चोरी करने के बारे में आरोपियों का कहना है कि वहां सबसे आसान है। पास-पड़ोसी एक दूसरे को पहचानते भी नहीं है।
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अलसुबह ही रैकीआरोपी किसी भी शहर में पहुंचने के बाद सी ग्रेड की होटल में कमरा लेकर ठहरते थे। सुबह 6 से 9 बजे तक रैकी वह उसके बाद वारदात करते थे। वापस होटल में आकर नए कपड़े पहन इधर-उधर घूमते थे। मौका देखकर शहर छोड़ देते थे।
Published on:
16 Dec 2019 11:00 pm
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