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सभ्यता के संरक्षण में चूक, उजड़ सी गई धरोहर

आहाड़ सभ्यता के टीलों पर लगी थी आग, धरोहर की स्थिति पर क्षेत्रवासियों ने जताया अफसोस, वनस्पति के साथ जल गए सैकड़ों जीव-जंतु

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सभ्यता के संरक्षण में चूक, उजड़ सी गई धरोहर

सभ्यता के संरक्षण में चूक, उजड़ सी गई धरोहर

उदयपुर. चार हजार साल पुरानी आहाड़ सभ्यता के संरक्षित टीलों पर रविवार दोपहर को आग क्या लगी, पूरे क्षेत्र को उजाड़ दिया। यहां इतनी भीषण आग पहली बार ही लगी, जिसने ना सिर्फ क्षेत्रवासियों को, बल्कि विरासत प्रेमियों को आहत कर दिया। आहाड़ सभ्यता के दोनों टीलों पर वनस्पति और उसमें हजारों छोटे-बड़े जीव रहते थे। ये सभी आग के हवाले हो गए।
आहाड़ सभ्यता के टीले पूरी तरह से संरक्षित नहीं है। एक टीले की चारदीवारी टूटी होने से लोगों का प्रवेश होता है। कई लोग शौच के लिए प्रवेश करते हैं, जिससे यह शहर के बीच खुला शौचालय बना हुआ है। यही नहीं आसपास की कॉलोनियों से लोग कचरा भी फेंक देते हैं, जिससे हालत कूड़ेदान जैसी हो रही है।
क्षेत्रवासी बोले

बबूल की झाडिय़ों को दो माह पूर्व काटी थी। एक माह पूर्व भी छोटे धूलकोट पर आग लगी। दो चार दिन पहले भी लकडिय़ां हटाने को कहा। आग से बड़ी संख्या में जीव-जन्तु मर गए। एक करोड़ 35 लाख का टेंडर पाथ-वे बनाने का किया है। संरक्षण में प्रशासन की लापरवाही रही है।
हरीश वर्मा, अध्यक्ष, जयश्री कॉलोनी विकास समिति
हमने बताया था कि डेढ़ माह पूर्व झाडिय़ां कटाकर नहीं हटाई, जिससे आग लगी। शौचालय बना रखा है। संभवतया यहां बीड़ी-सिगरेट डालने के कारण आग लगी। संग्रहालय को भी आग ने घेर लिया था। यह पुरातत्व विभाग की गंभीर लापरवाही है। गंभीरता से विचार करने की जरुरत है।

नन्दलाल अग्रवाल, सचिव, धूलकोट चौराहा विकास समिति

सफाई के लिए कई बार कहा। पाथ-वे बनाने को लकडिय़ां काटी और उसी में आग लग गई। संग्रहालय में पुरानी सामग्री खराब हो सकती थी। महावीर जयंती पर जीव जंतु नष्ट होने पर दुख हुआ। कई बार शिकायतें की, लेकिन ध्यान नहीं देते। धरोहर का संरक्षण होना चाहिए।
संजीव चपलोत, उपाध्यक्ष, बाहुबली कॉलोनी समिति
पहले कई बार पुरातत्व विभाग को शिकायतें की। ठेकेदार की ओर से लकडिय़ां हटाई जानी थी, इसके लिए कहा था। यह तो जीव जंतु की हत्या है। दीवार टूटी होने लोग शौच करने जाते हैं। आसपास के लोग कचरा भी डालते हैं, जिससे हमारी बेशकिमती धरोहर भी कूड़ादान बनी हुई है।

बिहारी लाल भोई, सचिव, जयश्री कॉलोनी विकास समिति

इनका कहना..
आग लगने का कारण पता नहीं चल पाया है। चारदीवारी के पास लगे ट्रांसफार्मर से शॉर्ट सर्किट भी हो सकता है। गर्मी और हवाओं से आग पकड़ लेना भी संभव है। म्यूजियम में बहुमूल्य वस्तुएं है, जो पूरी तरह से सुरक्षित है। आहड़ के टीलों की क्षतिग्रस्त चारदीवारी सुधरवाने, तारबंदी, पाथ-वे और हाई मास्ट लाइट लगवाने के लिए एक करोड़ का बजट मिला था, जिसके तहत काम चल रहा है। जल्द ही समाधान हो जाएगा।

हिमांशु सिंह, अधीक्षक, आहाड़ संग्रहालय