
मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. लेकसिटी में यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा हैं। कुछ सडक़ें तो ऐसी है कि वहां आसानी से रोड पार करना भी मुश्किल है। भले ही उदयपुर की गिनती मेट्रो सिटी नहीं है लेकिन यहां पैदल चलने वाले आज इतने परेशान है तो आने वाले सालों में क्या होगा यह अहसास अभी हो रहा है। शहर में पहले जो सडक़ें बनी थी उन पर फुटपाथ का प्रावधान था, बनाए भी गए थे। बाद में विकास के नाम पर उन्हीं फुटपाथ को बनाने वाली एजेंसियों ने ही तुड़वा दिए। उनकी आंखों के सामने उन पर कब्जे हो गए, पैदल चलने वालों के लिए सुगम व सुरक्षित रास्ते बंद हो गए। बाद में बात आई लो कार्बन सिटी बनाने की तब बात उठी कि शहरों में फुटपाथ जरूरी है। आज शहर में फुटपाथ को लेकर विकास की बजाय विनाश ज्यादा हो रहा है। इस बीच पैदल चलने वाला आम आदमी बोल रहा है आखिर कैसे पैदल चले हम…..
इन चार केस में देखिए शहर की तस्वीर
केस 1 : शास्त्री सर्कल से अशोकनगर रोड पर फुटपाथ थे जिन पर फल बेचने वाले खड़े होते थे, अब वे सडक़ पर खड़े रहते है मतलब फुटपाथ गायब है।
केस 2 : एमबी कॉलेज रोड से दुर्गानर्सरी होकर सुखाडिय़ा समाधि तक फुटपाथ था अब वहां अतिक्रमण है, वाहनों की पार्किंग है, पैदल चले तो कैसे चले, सबसे व्यस्त मार्ग है, रोड पार करना भी मुश्किल है।
केस 3 : शक्तिनगर में फुटपाथ था, वहां सडक़ चौड़ा करने के लिए उसे हटा दिया। आज नई नवेली सडक़ पर फुटपाथ वाली जगह पर वाहनों की अवैध पार्किंग होने लगी है। फुटपाथ भी गया और नई सडक़ पर भी कब्जा हो गया।
केस 4 : हिरणमगरी सेक्टर तीन नेहरू हॉस्टल के सामने से लेकर जड़ाव नर्सरी तक फुटपाथ का क्षेत्र विकसित किया, जालियां लगाई गई। वहां पर अधिकतर जगह कब्जे हो गए है, कहीं जालियां तोडक़र ले गए।
हमारे यहां फुटपाथ व्यवस्थित नहीं है। उन पर सब्जी, फू्रट वाले बैठे है, उनका रोजगार नहीं छिने लेकिन उनकी जान को कितना खतरा है यह सोचने वाली बात है। पैदल चलने वालों के लिए तो रास्ते ही बंद हो जाते है। फुटपाथ तोडऩा गलत है। जरूरत इस बात की है कि नई सडक़ों के साथ अच्छे फुटपाथ साथ में ही बनाने चाहिए। जो फुटपाथ पर बैठे है उनको दूसरी जगह शिफ्ट कर फुटपाथ खाली कराने चाहिए।
– नारायण जाट, निदेशक आधार फाउण्डेशन
फुटपाथ बचे ही कहा है। जो है उन पर अतिक्रमण हो गए है और सडक़ चौड़ी करने के नाम पर फुटपाथ तोड़ दिए गए। इससे एक तो पैदल चलने वाले असुरक्षित हो गए है और दूसरा फुटपाथ पर लगे पेड़ भी खत्म हो गए है। जान का खतरा और पर्यावरण का नुकसान सबके सामने है। फुटपाथ इस शहर में जगह-जगह थे लेकिन अब दिखते ही नहीं, होना चाहिए कि यातायात के भारी दबाव के बीच राहगीरों के लिए फुटपाथ होना जरूरी है।
– रिचा पियुष, सलाहकार राजस्थान सडक़ सुरक्षा सोसायटी
देखिए पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होना चाहिए, इससे वे सुरक्षित रहेंगे। दूसरी बड़ी बात यह है कि फुटपाथ हो या सार्वजनिक स्थान वहां दुकानदारों को सामान नहीं रखना चाहिए।
– पर्वत सिंह, डिप्टी (यातायात)