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धन्य हो उदयपुर की नगर निगम! पंक्चर वाले का रुपया भी नहीं छोड़ा, अदालत ने दिए आदेश लौटाओ ब्याज समेत बकाया

udaipur nagar nigam बिल लेकर पहुंचा कोर्ट की शरण में पहुंचा परिवादी
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धन्य हो उदयपुर की नगर निगम! पंक्चर वाले का रुपया भी नहीं छोड़ा, अदालत ने दिए आदेश लौटाओ ब्याज समेत बकाया

धन्य हो उदयपुर की नगर निगम! पंक्चर वाले का रुपया भी नहीं छोड़ा, अदालत ने दिए आदेश लौटाओ ब्याज समेत बकाया

उदयपुर. udaipur nagar nigam जानकर आश्चर्य होगा! स्मार्ट सिटी सहित शहरी विकास के नाम पर सालाना करोड़ों रुपए खर्च करने वाले उदयपुर नगर निगम की नीयत एक पंक्चर निकालने वाले गरीब व्यापारी के बिल पर खराब हो गई। बिल भुगतान के नाम पर जिम्मेदारों ने परिवादी के हिस्से के 60 हजार रुपए काट लिए। मेहनत की गाढ़ी कमाई वसूलने के लिए पसीने बहाने के बाद परिवादी ने बिल के साथ न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने सुनवाई में सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर निगम को दोषी माना और60 हजार 281 रुपए की डिक्री पारित की। आदेश में दावा तारीख से वसूली तक बकाया भुगतान पर 9 तिशत ब्याज देने को कहा। इसके अलावा बिलों की फोटो प्रति नगर निगम आयुक्त को भेजते हुए जिम्मेदार अधिकारी/ कार्मिक के विरुद्ध दो माह में कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अपर जिला एवं सेशन न्यायालय क्रम-२ के पीठासीन अधिकारी महेंद्र कुमार दवे ने यह निर्णय शास्त्री सर्कल स्थित शांतिलाल टायर वक्र्स के प्रोपराइटर शांतिलाल पुत्र उदयलाल रेगर की ओर से नगर निगम जरिए आयुक्त के खिलाफ दायर वसूली वाद पर सुनाया।

यह था मामला
वादी ने बताया कि उसकी शास्त्री सर्कल पर स्थित दुकान से नगर निगम प्रतिदिन वाहनों के टायर रिपयरिंग व पंक्चर से संबंधित का काम करवाता आ रहा है। निगम के पास कार जीप सहित ६५ वाहन है। इनमें कुछ वाहन निगम के है तथा कुछ को उन्होंने ठेके पर ले रखे हैं। दुकान पर आने वाली प्रत्येक गाड़ी में कार्य करने के बाद चालक व प्राप्तकर्ता के हस्ताक्षर करवाते हुए निगम को बिल दिए। १० मार्च २०१० से ३१ मार्च २०१२ की अवधि में कुल १.६४ लाख का कार्य किया। इसके एवज में समय-समय पर निगम ने जरिए चैक से १.०४ लाख का भुगतान किया। कुछ बिलो का भुगतान रोक दिया, लेकिन कारण नहीं बताया। ९ अगस्त २०१२ को पत्र के जरिए बकाया 68,249 की मांग की। निगम ने कोई जवाब नहीं दिया, न ही राशि से इनकार किया। पत्र प्राप्ति के बाद 780 व 7190 का चैक से भुगतान किया। शेष राशि के लिए टरकाते रहे।

न्यायालय में मुकर गया निगम
नगर निगम की ओर से न्यायालय में जवाब दिया गया कि वादी को वाहनों के पंक्चर निकाले जाने का कोई ठेका या कार्यादेश कभी नहीं दिया। जब-जब वादी से टायर, ट्यूब का कार्य कराया। तब उसे बिल प्राप्त कर यथा समय भुगतान किया। उसने मनमर्जी से वाहनों को उल्लेख किया है। अवधि में परिवादी ने बाकियात बताई उस समये उसे भुगतान किया गया। udaipur nagar nigam इन्द्राज गेराज शाखा की पत्रावली में पंक्चर की नोट सीट पर मौजूद है।