
VIDEO ; भूमिगत लाइनों में फॉल्ट आया तो अंधेरे में डूबेगा शहर
धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. शहर में यूआईटी और नगर निगम के सहयोग से बिजली की कई लाइनों को अंडर ग्राउंड किया गया लेकिन इन लाइनों के फॉल्ट को ढूंढने में काफी परेशानी होती है। विद्युत निगम के पास इसके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं है। छोटे से फॉल्ट को दूर करने में घंटों मशक्कत करनी पड़ती है।शहर में करीब 45 किलोमीटर की विद्युत लाइन को अंडर ग्राउंड किया गया है जिनसे बड़े क्षेत्र में विद्युत सप्लाई होती है। इनमें फॉल्ट ढूंढने के परम्परागत तरीकों में कई बार समय अधिक लगने से कर्मचारियों को क्षेत्रवासियों के रोष का सामना करना पड़ता है।
सवीना में बिगड़ा माहौल
करीब चार वर्ष पूर्व सवीना क्षेत्र में रात को बिजली गुल हो गई। विद्युत निगम के कर्मचारियों ने अंडर ग्राउंड लाइन में फॉल्ट ढूंढ़ा। एेसे में कर्मचारियों ने अन्य लाइन से सप्लाई देने का प्रयास किया, लेकिन उसमें भी फॉल्ट मिला। इससे घंटों बिजली गुल रही और कर्मचारियों को लोगों के रोष का सामना करना पड़ा। समाधान के लिए दोहरी लाइनअंडर ग्राउंड लाइन डालते समय उसे दोहरा किया जाता है। किसी कारण से एक लाइन में फॉल्ट आने पर दूसरी लाइन से सप्लाई शुरू कर दी जी जाती है।
यूआईटी को लेनी है मशीन
पूर्व में नगर विकास प्रन्यास की बैठक में अंडर ग्राउंड लाइन में फॉल्ट के मुद्दे पर चर्चा हुई। तब यूआईटी ने अपने मद से अजमेर विद्युत वितरण निगम को फॉल्ट ढूंढने के लिए मशीन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन अधिकारियों की उदासीनता से निगम को अब तक मशीन नहीं मिल पाई है।
गिरे मशीन के दाम
अंडर ग्राउंड विद्युत लाइन में फॉल्ट ढूंढने के लिए फॉल्ट लोकेटर मशीन आती है। यूआईटी ने जब यह मशीन देने का आश्वासन दिया तब इसकी कीमत करीब ४० लाख रुपए थी लेकिन अब इसकी कीमत करीब २५ लाख रुपए हो गई है।
एेसे ढूंढती है मशीन फॉल्ट
मशीन से फॉल्ट ढूंढने के लिए पहले ट्रांसफार्मर से सप्लाई काटी जाती है। बाद में मशीन से इसमें करंट छोड़ा जाता है। इस करंट को जहां अर्थ मिलता है, उस जगह की दूरी मशीन बता देती है। इसके बाद उसी जगह पर खुदाई कर आसानी से फॉल्ट को दूर किया जा सकता है।शहर में कई जगह अंडर ग्राउंड लाइनें 5 से 7 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं।
Updated on:
23 Feb 2019 09:46 pm
Published on:
23 Feb 2019 09:46 pm
