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उदयपुर। परिवहन विभाग के लिए हर नया वित्तीय वर्ष नई जिम्मेदारियों के साथ-साथ बढ़ते राजस्व दबाव भी लाता है। उदयपुर आरटीओ के सामने इस बार स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 464 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य मिला, जिसमें वास्तविक वसूली 390 करोड़ रुपए तक हुई। यानी विभाग लक्ष्य से करीब 74 करोड़ रुपए पीछे रह गया। अब नए वित्तीय वर्ष में यह लक्ष्य बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए कर दिया है, जिससे परफॉर्मेंस सुधारने के साथ-साथ राजस्व गैप भरने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इसकी पूर्ति के लिए वाहनों की भरपूर धरपकड़ होगी।
पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े बताते हैं आरटीओ विभाग लक्ष्य से करीब 74 करोड़ रुपए पीछे रह गया। इसके पीछे कई ठोस कारण सामने आए। बड़ी संख्या में वाहनों की फिटनेस लंबित रहने से अपेक्षित राजस्व नहीं मिल पाया। वहीं, कमर्शियल वाहनों के नए रजिस्ट्रेशन में भी अनुमान के मुकाबले कमी रही, जिससे टैक्स कलेक्शन प्रभावित हुआ। इसके अलावा ई-चालान की रिकवरी की रफ्तार धीमी रहने और पुराने बकाया की वसूली नहीं हो पाने से भी राजस्व पर असर पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इन बिंदुओं पर इस वर्ष विशेष फोकस रखा जाएगा।
इस बार 500 करोड़ रुपए के टारगेट को देखते हुए विभाग सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। बिना टैक्स वाले वाहनों, ओवरलोडिंग, और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही चेकिंग पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और तकनीकी संसाधनों का अधिक उपयोग किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि नियमित मॉनिटरिंग और सख्त कार्रवाई से राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।
शहर में लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या आरटीओ के लिए एक सकारात्मक संकेत है। नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और टैक्स से विभाग को अच्छा राजस्व मिलता है। हालांकि, इसके साथ ही अवैध संचालन, बिना परमिट वाहन और टैक्स चोरी जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं, जो लक्ष्य हासिल करने में बाधा बनती हैं।
राजस्व बढ़ाने के लिए विभाग डिजिटल सिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। ऑनलाइन टैक्स जमा, ई-चालान और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर रहेगा। इससे न सिर्फ भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि राजस्व संग्रह की प्रक्रिया भी तेज और प्रभावी होगी।
राज्य सरकार की ऑटोमेटेड ई-चालान व्यवस्था के तहत अब टोल बूथों और हाईवे नेटवर्क पर नियम उल्लंघन करने वाले वाहनों के चालान लगातार जारी किए जा रहे हैं। इस प्रणाली से ओवरलोडिंग, बिना परमिट और टैक्स डिफॉल्ट जैसे मामलों पर स्वतः निगरानी हो रही है, मौके पर ही ई-चालान कट रहे हैं। इससे न सिर्फ प्रवर्तन व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि राजस्व वसूली में भी तेजी देखी जा रही है। इस व्यवस्था से ओवरलोडिंग, बिना परमिट और टैक्स डिफॉल्ट करने वाले वाहनों की तुरंत पहचान कर उन पर मौके पर ही कार्रवाई संभव होगी। इससे राजस्व संग्रह में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस बार विभाग का फोकस पूरी तरह राजस्व वृद्धि और सिस्टम सुधार पर रहेगा। सख्त मॉनिटरिंग, डिजिटल व्यवस्था और रिकवरी ड्राइव के जरिए तय लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
ज्ञानदेव विश्वकर्मा, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी
Updated on:
30 Apr 2026 03:54 pm
Published on:
30 Apr 2026 03:29 pm
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