
सिटी पैलेस में मंचासीन सम्मानित विभूतियां, पत्रिका फोटो
Mewar Foundation Awards: इतिहास की गूंज के बीच सिटी पैलेस के भव्य माणक चौक में गौरव का एक और अध्याय रचा गया। रविवार की शाम राजसी आभा से आलौकित ऐतिहासिक प्रांगण में जब विभूतियों का सम्मान हुआ तो मानो मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा वर्तमान से संवाद करती दिखाई दी। विरासत, संस्कृति और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मेवाड़ ने फिर उस गौरव को पुनः रेखांकित किया, जहां कर्तव्य, समर्पण और सेवा को राजसी गरिमा के साथ नमन किया गया।
मौका था महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन के 42वें वार्षिक सम्मान समर्पण समारोह का। समारोह में 1 अंतरराष्ट्रीय, 5 राष्ट्रीय, 9 राज्यस्तरीय और 3 नगर स्तरीय अलंकरण दिए गए। सभी वर्गों में कुल 104 जनों को सम्मानित किया गया। महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष और प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विभूतियों को अलंकृत किया। 2 घंटे चले समारोह में शहर के प्रबुद्धजन साक्षी बने। स्वागत गीत के साथ शुरू हुए समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
फाउंडेशन की ओर से इस बार का कर्नल जेम्स टॉड अंतरराष्ट्रीय अलंकरण डॉ. मॉली एम्मा एटकिन को दिया गया। डॉ. मौली द ग्रेजुएट सेंटर सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क कला इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर है। पहली बार 1991 में भारत आईं। राजपूत और मुगल चित्रकला के जाने-माने उस्ताद बन्नूजी से प्रशिक्षण लिया। वे शोध के लिए उदयपुर में रहीं। शहर की वास्तुकला, भित्तिचित्रों और चित्रकला के संग्रहों का अध्ययन किया।
महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष और प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विभूतियों को सम्मानित किया। जब वे उद्बोधन के लिए आए तो भावुक हो गए। उन्होंने मेवाड़ में विभूतियों के सम्मान की परंपरा और इतिहास पर प्रकाश डालने के साथ ही अपने दिवंगत पिता अरविंदसिंह मेवाड़ को याद किया। यह पहला मौका है, जब उनके फाउंडेशन अध्यक्ष और प्रबंध न्यासी बनने के बाद सम्मान समारोह आयोजित हुआ है।
महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष और प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की पुत्री मोहलक्षिका सिंह मेवाड़ ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने मेवाड़ की विरासत, परंपरा का परिचय देते हुए अपने पिता के नेतृत्व में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी दी।
लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ ने कहा कि पिता की गैर मौजूदगी का सन्नाटा है। उनके आशीर्वाद हमेशा हौसला देता है। दादा भगवत सिंह की सोच से फाउंडेशन सम्मान की नींव रखी गई। मेवाड़ की परंपरा रही है कि ईश्वर से पहले संतों को सम्मान दिया जाता है। हमारी संस्कृति ही है, जिससे लोगों को प्रेरित करना चाहते हैं। डेढ़ सौ साल पहले बालिका शिक्षा को बढ़ावा मेवाड़ की सोच रही है। हमेशा इंसान नहीं, बल्कि उसके कर्म बड़े होते हैं।
Published on:
16 Mar 2026 08:48 am
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