
बलीचा डंपिंग यार्ड में कचरे के पहाड़ व बारिश में खराब हुआ रास्ता
उदयपुर. सुबह शहर की गलियों में स्वच्छता गीत बजाता छोटा ऑटो पहुंचता है। घरों से लोग कचरे की बाल्टी लेकर बाहर आते हैं और ऑटो में कचरा डालते हैं। यहीं से रोज निकलने वाले करीब 330 टन कचरे का सफर शुरू होता है। घर से कचरा उठ जाना सफाई की आखिरी कड़ी नहीं है। इसके बाद असली कहानी शुरू होती है कचरा कहां पहुंचा, कितना अलग हुआ, कितना प्रोसेसिंग यूनिट तक गया और कितना बलीचा के डंपिंग यार्ड में पहुंचकर कचरे के पहाड़ में बदल गया।
राजस्थान पत्रिका ने कचरे के इस पूरे नेटवर्क को कड़ी-दर-कड़ी देखा तो तस्वीर साफ हुई शहर से कचरा उठाने की व्यवस्था चल रही है, पर कचरे का पूरा निस्तारण नहीं हो पा रहा। रोज निकलने वाले 330 टन कचरे में से करीब 150 टन का ही निस्तारण हो रहा है, जबकि करीब 160 से 170 टन कचरा सीधे बलीचा में डंप हो रहा है। डंपिंग यार्ड में पहले से करीब चार साल पुराना कचरा जमा है। यानी रोज आने वाला नया कचरा पुराने ढेर पर एक और परत चढ़ा रहा है और कचरे का पहाड़ लगातार बढ़ रहा है। दूसरी तरफ सुबह-शाम कचरा उठाने की व्यवस्था के बावजूद शहर अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो पा रहा। कई जगह सड़क किनारे, खाली भूखंडों और कचरा प्वाइंटों पर ढेर लगे है।
330 टन कचरे का हिसाब
कचरे का स्रोत प्रतिदिन अनुमानित मात्रा आगे का सफर
निगम क्षेत्र के 80 वार्ड का घर-घर कचरा करीब 90 टन ट्रांसफर स्टेशन, फिर बलीचा-तितरड़ी में यूनिट तक
सड़कों के अलग-अलग प्वाइंट का कचरा करीब 60 टन बलीचा डंपिग यार्ड में
यूडीए के चार जोन का घर-घर कचरा करीब 80 टन सीधा बलीचा डंपिंग यार्ड
शहर के करीब 125 कचरा प्वाइंट करीब 70 टन बड़ी मात्रा में डंपिंग यार्ड
यूडीए जोन की सड़क-नाली का कचरा करीब 60 टन डंपिंग यार्ड व सुनसान जगह पर
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का कचरा करीब 50 टन प्रोसेसिंग यूनिट बलीचा व तितरड़ी में
कुल करीब 330 टन करीब 150 टन प्रोसेस 160-170 टन डंपिंग
ऐसे पहुंचता है कचरा
पहली कड़ी : 120 वाहनों से कचरा सिख कॉलोनी पहुंचता है
पुराने निगम क्षेत्र के 80 वार्डों से रोज करीब 90 टन कचरा निकल रहा है। इसे उठाने के लिए करीब 120 वाहन लगाए हैं। घर-घर कचरा संग्रहण के दौरान ऑटो में मौजूद हेल्पर गीले और सूखे कचरे को अलग करने की कोशिश करता है। कई बार घरों से मिला कचरा मिला-जुला होता है, ऐसे में वाहन में ही हाथ से उसकी छंटाई करनी पड़ती है। यह कचरा सिख कॉलोनी स्थित ट्रांसफर स्टेशन पहुंचता है। यहां कचरे को दोबारा गीला और सूखा अलग किया जाता है। इसके बाद मशीन से कचरे को दबाकर छोटे-बड़े कैप्सूल में भरा जाता है। ट्रांसफर स्टेशन से रोज करीब छह कैप्सूल तीन गीले और तीन सूखे कचरे के बलीचा और तितरड़ी स्थित यूनिट तक पहुंचते हैं। ट्रांसफर स्टेशन की व्यवस्था का फायदा यह है कि हर छोटे वाहन को बलीचा तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती। कचरा एक जगह एकत्र होकर दबाया जाता है और फिर बड़े परिवहन साधनों से आगे भेजा जाता है। इससे परिवहन और समय दोनों की बचत होती है।
दूसरी कड़ी : यूडीए के चार जोन में 80 टन, लेकिन ट्रांसफर स्टेशन नहीं
कचरे के पूरे नेटवर्क में सबसे बड़ा अंतर यूडीए के चार जोन में दिखाई देता है। बलीचा-तितरड़ी, बेड़वास-प्रतापनगर, भुवाणा-शोभागपुरा और बड़गांव-रामपुरा-बड़ला क्षेत्र से करीब 100 ऑटो रोज घर-घर से लगभग 80 टन कचरा उठा रहे हैं। समस्या यह है कि यह कचरा निगम क्षेत्र की तरह ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचकर व्यवस्थित रूप से दबाया और कैप्सूल में भरकर यूनिट को नहीं भेजा जा रहा। बड़ी मात्रा में कचरा ऑटो से सीधे बलीचा डंपिंग यार्ड में डंप हो रहे है। इन चार जोन में अभी निगम क्षेत्र जैसी जीपीएस आधारित वाहन निगरानी व्यवस्था भी नहीं है। इससे वाहन वास्तव में कहां जा रहा है और कचरा कहां खाली कर रहा है, इसकी निगरानी नहीं है। कुछ वाहन चालक डंपिंग यार्ड तक जाने के बजाय सुनसान जगहों पर कचरा खाली
तीसरी कड़ी : 125 कचरा प्वाइंट, नालियां और सड़कें भी बना रही दबाव
शहर में करीब 125 कचरा प्वाइंट हैं। इन प्वाइंटों से रोज करीब 70 टन कचरा निकल रहा है। इसके अलावा यूडीए के चार जोन में सड़कों और नालियों से करीब 60 टन कचरा अलग से निकलता है। यानी घरों से निकलने वाले कचरे के अलावा सड़क, नाली और सार्वजनिक कचरा प्वाइंट उठकर बड़ा हिस्सा बलीचा पहुंचकर सीधे डंप हो रहा है।
चौथी कड़ी : बाजार और दुकानों से 50 टन कचरा, नई व्यवस्था अभी संभल रही
शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से रोज करीब 50 टन कचरा निकल रहा है। यह कचरा भी प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाया जा रहा है। मौजूदा व्यवस्था में करीब 26 वाहन इस कचरे को आगे ले जा रहे हैं और लगभग 60-65 टन तक कचरा व्यावसायिक कचरे प्रोसेसिंग यूनिट पहुंच रहा है। व्यावसायिक कचरा संग्रहण के लिए करीब 3600 प्रतिष्ठान पंजीकृत हैं। नई व्यवस्था शुरू होने के बाद फिलहाल करीब 1200 प्रतिष्ठानों से कचरा उठाया जा रहा है। इसके लिए करीब 14 वाहन लगाए गए हैं। आगे व्यवस्था को कंप्यूटरीकृत करने और एप के माध्यम से प्रतिष्ठानों की निगरानी करने की योजना है।
बलीचा पहुंचते ही दो रास्ते एक यूनिट में एक कचरे का ढेर
कचरे के इस पूरे सफर का अंतिम और सबसे अहम पड़ाव है बलीचा-तितरड़ी क्षेत्र। यहां सूखे कचरे के लिए एमआरएफ यानी सामग्री छंटाई एवं गीले कचरे के लिए कम्पोस्ट संयंत्र और जैविक कचरे से गैस बनाने के लिए बायो-सीएनजी संयंत्र की व्यवस्था है। इन इकाइयों के बावजूद शहर में रोज निकलने वाले करीब 330 टन कचरे में से करीब 150 टन का ही प्रसंस्करण हो पा रहा है। दूसरी ओर करीब 160 से 170 टन कचरा प्रतिदिन सीधे बलीचा डंपिंग यार्ड में जा रहा है। डंपिंग यार्ड में रोज करीब 150 वाहन सीधे कचरा खाली करने पहुंच रहे हैं। बलीचा व तितरड़ी यूनिट में रोज आने वाले कचरे का एक हिस्सा मशीनों तक पहुंचकर छंटाई, खाद या गैस बनाने की प्रक्रिया में जाता है।
तीन साल से ज्यादा पुराना कचरा अब भी बलीचा में
बलीचा की समस्या केवल आज आने वाले कचरे की नहीं है। यहां तीन साल से ज्यादा पुराना कचरा भी जमा है। रोज 160-170 टन नया कचरा डंप होने के साथ पुराने कचरे का दबाव भी बना हुआ है। बारिश के समय स्थिति और कठिन हो जाती है। डंपिंग यार्ड तक पहुंचने वाली सड़क खराब होने से वाहनों को परेशानी होती है। कई बार वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है और कचरा आसपास के खुले हिस्सों में खाली किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। कचरे में आग लगने की घटनाएं भी आसपास के क्षेत्र के लिए परेशानी बनती हैं। धुआं और दुर्गंध दक्षिण विस्तार सहित आसपास के इलाकों तक पहुंचती है। यानी कचरे का पहाड़ केवल बलीचा की जमीन पर नहीं बढ़ रहा, उसका असर आसपास रहने वाले लोगों तक भी पहुंच रहा है।
यह हो तो कुछ हद तक सुधर सकती है व्यवस्था
- कचरे की आवाजाही को कम करने के लिए यूडीए के चारों जोन में ट्रांसफर स्टेशन बनाए जाए। ताक डोर-टू-डोर वाहनों को सीधे लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़े।
- ट्रांसफर स्टेशन होंगे तो परिवहन लागत कम होगी, वाहनों की दूरी और रखरखाव घटेगा, ईंधन की बचत होगी और मानव संसाधन का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
- यूडीए जोन के वाहनों में भी जीपीएस आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने से यह पता चल सकेगा कि कचरा संग्रहण वाहन कहां गया, कितना कचरा उठाया और कहां खाली किया।
Updated on:
20 Sept 2026 05:50 pm
Published on:
20 Sept 2026 05:50 pm
