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VIDEO : कल्याणकारी योजनाएं जब कानून का दर्जा पा लेती है तो नौकरशाही की भूमिका असफल : अग्निहोत्री

- नंद चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान सम्पन्न- भारतीय लोकतंत्र और नौकरशाही पर हुआ व्याख्यान  
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VIDEO : कल्याणकारी योजनाएं जब कानून का दर्जा पा लेती है तो नौकरशाही की भूमिका असफल : अग्निहोत्री

धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. लोक कल्याणकारी योजनाएं जब काननू का दर्जा पा गई है तो इसका अर्थ यह है कि नौकरशाही की पूर्व भूमिकाएं असफल हो गई। यह बात नंद चतुर्वेदी फाउंडेशन उदयपुर की ओर से हुए नंद चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान में मुख्य वक्ता पूर्व सचिव भारत सरकार प्रो. डॉ. सतीश अग्निहोत्री ने कही।

उन्होंने कहा कि नौकरशाही ने कई दौर में अलग-अलग भूमिका निभाई है। नौकरशाही ने विकास कार्यों में योगदान दिया है। इन कार्यों में नौकरशाही की भूमिका सकारात्मक रही है। लेकिन कई बार लोक कल्याणकारी योजनाओं को लेकर कानून बनते है। इसका मतलब यह हुआ कि नौकरशाही की इन योजनाओं को लेकर की गई भूमिकाएं असफल हुई। उन्होंने वैश्वीकरण को प्रतिक्रांति मानते हुए उसके खतरों से आगाह किया और यह विश्वास प्रकट किया कि नौकरशाहों की प्रजातंत्र में असली जिम्मेदारी संविधान के प्रति है।
सभा का संचालन प्रो. अरुण चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर साहित्यकार किशन दाधीच, समाजशास्त्री नरेश भार्गव, जैनब बानू सहित कई विद्वान मौजूद थे। डॉ. अग्निहोत्री ने उपस्थित प्रबुद्ध जनों के सवालों के जवाब भी दिए।

मजबूत लोकतंत्र के लिए नौकरशाही महत्वपूर्ण

टिप्पणीकार मोहनलाल विश्वविद्यालय उदयपुर के राजनीति शास्त्र के अध्यक्ष प्रो. संजय लोढ़ा उभरते हुए राष्ट्रवाद के खतरों की तरफ ध्यान इंगित करते हुए कहा कि राष्ट्रवाद और प्रजातंत्र में एक का चुनाव करने की बात सही नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नौकरशाही का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार हमारे सामने संचित और वंचित वाली स्थिति आ जाती है। इसमें संचितों का पता होता है कि वंचित क्या कर रहे हैं। लेकिन वंचितों को पता नहीं होता कि संचित क्या कर रहे हैं।

तय हो नौकरशाहों की नियुक्ति की समय सीमा

बांसवाड़ा के गोविंद गुरु जनजाति विश्वविद्यालय के कुलपति कैलाश सोड़ानी ने नौकरशाही के स्वरूप को बदलने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नौकरशाहों की नियुक्ति भी एक समय सीमा में होनी चाहिए। खासकर उच्च पदों पर आसीन नौकरशाहों की नियुक्ति।

समाज और सरकार भी आगे आए

नंद चतुर्वेदी फाउंडेशन के सचिव अनुराग चतुर्वेदी ने कहा कि नंद चतुर्वेदी की जन्म शताब्दी जल्द ही आने वाली है। इसकी तैयारियां संस्थान तो कर ही रहा है लेकिन उदयपुर के समाज और राजस्थान सरकार को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।