
video: विश्व साइकिल दिवस पर लेकसिटी ने दिया सेहत सुधार का संदेश, डेली साइक्लिंग करनी होगी आदत में शुमार
उदयपुर . 'कुछ बरस पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने आमजन से सप्ताह का एक दिन 'साइकिल डे’ के रूप में मनाने का आह्वान किया था। उनकी मंशा भले ही डीजल-पेट्रोल बचाने की रही हो। लेकिन, इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ लोगों की सेहत भी सुधरेगी। भागदौड़ भरी जिंदगी में आम आदमी गांव, शहर अथवा महानगरों के विस्तार के कारण भौतिक संसाधनों का इस कदर गुलाम हो गया है कि साइक्लिंग को आदत में शुमार करने की कल्पना भी बेमानी है।
हालांकि, कुछ लोग शौकिया तौर पर साइकिल चलाते मिल ही जाएंगे। इनकी संख्या सामाजिक चेतना की अलख जगाने के लिए पर्याप्त है।’ यह मानना है हर रविवार अलसुबह पिछोला-फतहसागर नियमित साइकिल राइड पर आने वाली 'चेंज साइक्लिंग ग्रुप’ के सदस्यों का। बेशक, इस ग्रुप के गठन को ज्यादा अरसा नहीं हुआ है फिर भी अल्प समय में दो से चार और चार से चालीस हुए मेंबर्स मिलकर नई संभावनाएं जगा रहे हैं। रविवार सुबह पत्रिका संवाददाता ने इस ग्रुप से फतहसागर के रानी रोड छोर पर बात की तो साइकिल राइड को लेकर कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए।
यंू तो अधिकांश सदस्य नियमित 10 से 15 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं लेकिन छुट्टी के दिन वे ग्रुप राईड में 30 से 40 किलोमीटर दूरी तय कर लेते हैं। वल्र्ड साइकिल डे के खास मौके पर भी अधिकांश सदस्य शहर के आसपास क्षेत्रों में साइकिल राईड पर निकले हुए थे। ग्रुप से जुड़े नीतेश टांक ने बताया कि बेतरतीब तरीके और अनियमित रूप से साइकिल राइड के परिणाम लाभकारी नहीं हो सकते हैं। इसके लिए अच्छी साइकिल होने के अलावा सेफ्टी मेजर्स (हैलमेट और नी कैप पहनने) फॉलों करने की भी आवश्यकता होती है। ग्रुप के अन्य सदस्य कैलाश व रेखा जैन का कहना है कि व्यावसायिक प्राथमिकताओं के चलते नियमित साइकिल राइड संभव नहीं हो पाता था लेकिन, इस ग्रुप में शामिल होने से कारण शारीरिक और मानसिक स्ट्रेन्थ के साथ ही सोशल बॉन्डिंग भी स्ट्रॉन्ग हुई है।साइकिल ग्रुप में अलग-अलग आयु वर्ग के मेंबर्स एक-दूसरे से प्रेरित करते हैं।
शेष सदस्यों में अरुनेश कोठारी, सुमित शर्मा, कपिल कुमावत, रूद्रप्रताप सिंह, गजेन्द्र साहू, प्रताप सिंह चावड़ा ने भी कहा कि शहरवासियों को अधिकाधिक संख्या में इसे आदत में शुमार कर सफल बनाना होगा। केवल दिखावे के लिए कुछ दिन साइकिल चलाने का कोई अर्थ नहीं है। आदर्श वे हैं जो वर्क प्लेस पर साइकिल से या पैदल जाते हैं। उपक्षित पड़े हैं साइकिल कियोस्क पिछले कुछ बरसों में शहर के कई लोगों में साइकिल चलाने के प्रति शौक और जागरूकता बढ़ी है। आलोक संस्थान के डॉ. प्रदीप कुमावत ने भी फतहसागर-पिछोला व दूधतलाई साइक्लिंग क्लब के माध्यम से शहर के युवाओं में पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से जागृति जगाने का काम किया है। दूध तलाई पर जन सहभागिता से लगाए साइकिल कियोस्क की उपेक्षा से वे बेहद खिन्न नजर आए।
लोग जागरूक होने लगे न्यू फतहपुरा निवासी किशोर पाहुजा पिछले कई वर्षों से घर से कार्यालय की दूरी पैदल या साइकिल से ही तय करते हैं। इनसे प्रेरित होकर मनोज कटारिया भी घर से दफ्तर तक साइकिल से आने-जाने लगे हैं। इन्होंने फेसबुक पर साइक्लिस्ट ग्रुप के जरिए कई लोगों को जोड़ रखा है।
ऐसा है यहां का साइकिल ट्रेक
लेकसिटी के साइकिल राईडर्स के लिए प्रशासन ने कुछ बरस पूर्व रानी रोड छोर पर साइकिल ट्रेक बनवाया तो था। लेकिन, पब्लिक अवेयरनेस के अभाव में फिलहाल वह उपेक्षित और बदहाल नजर आता है। इसी ट्रेक पर साइक्लिंग करते कुछ स्कूली बच्चों ने बताया कि यंू तो ट्रेक इतना बुरा भी नहीं है। हां, बहुत बार कुछ समाजकंटक या शरारती तत्व जानबूझकर ट्रेक पर दुपहिया वाहन चलाने लगते या पार्क कर देतें हैं, तब अखरता है। इसी तरह, हैल्थ एंड फिटनेस ट्रेनर ऋषभ जैन का कहना था कि साइकिल ट्रेक वाले छोर पर कम से कम सुबह 8 बजे तक भारी वाहनों की आवाजाही पर बैन लगाया जाना चाहिए। तो कुछ का मानना था कि वर्तमान में बनाया साइकिल टे्रक स्मार्ट सिटी के स्तर का भी नहीं है।
Updated on:
03 Jun 2018 05:34 pm
Published on:
03 Jun 2018 04:45 pm
