
INTERVIEW : जानिए लॉकडाउन में क्या कर रहे है उदयपुर के उच्च शिक्षण संस्थान
जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. लॉकडाउन में उच्च शिक्षा संस्थान मसलन विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और आइआइएम जैसे संस्थान भी अब ऑनलाइन स्टडी की राह पकड़ चुके हैं या इसकी तैयारी कर रहे हैं। कोरोना महामारी की वजह से बाकी रहे इम्तिहानों को पूरा करवाने की योजना बना रहे हैं, वहीं नए शैक्षणिक सत्र से पहले घरों में ही विद्यार्थियों को पढ़ाने की भी कसरत हो रही है। लॉकडाउन में अध्यापन जारी रखने, नए सत्र की तैयारियां, अकादमिक गतिविधियों और ऐसे हालात में इन संस्थानों की समाज के लिए भूमिका पर पत्रिका ने की उदयपुर के तीन टॉप हायर एजुकेशन इंस्टीट्यट के मुखियाओं से।
'किताबें लिख रहे, शोध-पत्र, बुकलेट्स-लिफलेट्स भी बना रहे हैं हमारे शिक्षक' : प्रो. नरेन्द्र सिंह राठौड़, कुलपति एमपीयूएटी एवं कार्यवाहक कुलपति मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय
1. यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में लॉकडाउन में पढ़ाई जारी रखने के लिए क्या प्रयास किए हैं?
जवाब : हमने एमपीयूएटी के अधीन पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लासेस शुरू कर दी है। गूगूल, वॉट्सअप पर 110 पाठ्यक्रमों में करीब साढ़े तीन हजार यानि 90 प्रतिशत पंजीयन किए हैं। उन्हें ऑनलाइन पाठ्यसामग्री उपलब्ध करवाई जाती है, चर्चाएं भी होती हैं। तीन सप्ताह की सामग्री ऑनलाइन दी जा रही है। सुविवि में सभी विषयों में 50 प्रतिशत विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ा चल रही है।
2. ऑनलाइन स्टडी से कितने विद्यार्थी, शिक्षक जुड़े हैं?
जवाब : हमारा सौ फीसदी शैक्षणिक स्टॉफ ऑनलाइन स्टडी से जुड़ा हुआ है। चूंकि सभी के पास ऑनलाइन अध्यापन करवाने की तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं, लिहाजा कोई परेशानी नहीं है। सभी शिक्षकों का समय तय है। सुबह 8 से दोपहर 12 तक तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
3. बाकी रह गई परीक्षाएं आयोजित कराने को लेकर क्या तैयारी है?
जवाब : एमपीयूएटी में कोई परीक्षाएं बाकी नहीं हैं। मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय में जो इम्तिहान बाकी रह गए हैं, उन्हें ग्रीष्मावकालीन अवकाश में ही करवाए जाएंगे। विद्यार्थी अपनी तैयारियां जारी रख सकते हैं। ग्रीष्मावकालीन अवकाश में जो भी जरूरी स्टॉफ होगा, उन्हें लगाकर शेष परीक्षाएं पूरी करवाएंगे। अगले शैक्षणिक सत्र में कोई दिक्कत नहीं आने देंगे। लॉकडाउन पर निर्भर करेगा कि हमारा कदम कैसा होगा।
4. प्रोफेसर, लेक्चरर्स कैसे कर रहे हैं वर्कफ्रॉम होम? अध्यापन के बाद के वक्त में वे किस तरह योगदान दे रहे हैं, उनकी उपस्थिति की गणना कैसे की जा रही है?
जवाब : शैक्षणिक स्टॉफ ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा भी कुछ विशेष काम कर रहा है। कुछ लोग बुक्स लिख रहे हैं, कुछ रिसर्च पेपर पर काम कर रहे हैं। कई लोग बुकलेट्स-लिफलेट्स तैयार कर रहे हैं। वे सहशैक्षणिक गतिविधियों में भी मशगूल हैं। उनकी मॉनिटरिंग सोशल मीडिया पर समूह बनाकर की जा रही है, जिनमें डीन, डायरेक्टर, रजिस्ट्रार और अन्य जिम्मेदार लोग जुड़े हैं। हर शिक्षक उन्हें और वे उच्च प्रबंधन तक काम को रख रहे हैं।
5. सरकार ने कर्मचारियों की तनख्वाहों में कटौती की है, हैं, विवि के कार्मिकों क्या पूरा वेतन मिलेगा?
उत्तर : हां, हमने मार्च की सेलेरी का 50 प्रतिशत हिस्सा ही भुगतान किया है। हालांकि तनख्वाह में कटौती नहीं होगी। यह इस स्थिति में महामारी से लडऩे के लिए संस्थानों को आर्थिक रूप से कमजोर होने से बचाने की रणनीति का हिस्सा है। बाकी वेतन बाद में मिलेगा। सम्भवत: जून या जुलाई में मिल सकता है।
'चुनिंदा आर्थिक गतिविधियां शुरू करने की योजना बनाने का वक्त' : प्रो. जनत शाह, निदेशक, भारतीय प्रबंधन संस्थान, उदयपुर
1. पेशेवर लोगों को इस वक्त वर्कफ्रॉम होम, फैमिली टाइम और लॉकडाउन परीरियड को मैनेज करने के क्या टिप्स देना चाहेंगे?
जवाब : हर ऑर्गेनाइजेशन के पेशेवरों के काम की संस्कृति अलग है। कुछ लोग ऑनलाइन काम कर सकते हैं, तो किसी की भौतिक रूप से कार्यस्थल पर मौजूदगी जरूरी है। जिनके पास सुविधाएं हैं, उन्हें ऑनलाइन काम जारी रखना चाहिए। साथ ही कुछ सृजनात्मक कार्य, कौशल विकास पर भी जोर दें। लॉकडाउन के बाद हम कार्यस्थल पर कैसे जाएंगे, इसकी तैयारी रखें। परिवार, सेहत पर ध्यान दें और सरकार की गाइडलाइन को फॉलो करें।
2. प्रबंधन की दृष्टि से देखें तो कोरोना काबू करने में सरकार के कामकाज में क्या बड़ी कमी दिखती है?
जवाब : परिस्थितियों के अनुसार सरकार ने अभी तक अच्छा काम किया है। अब फोकस करना होगा कि भविष्य में कैसे हम इकॉनोमी को गति दें। विकसित देशों की तरह हमारी सरकारों के पास उद्योगों को मदद के लिए इतना पैसा नहीं है। लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने चुनिंदा क्षेत्रों की अभी से तैयारी करनी होगी।
3. प्रबंधन की दृष्टि से सरकार और प्रशासन को क्या दो सलाह देना चाहेंगे, जो इस वक्त फायदेमंद होंगी?
जवाब : अगर हम भविष्य की तैयारी को लेकर बात करें तो हर सेक्टर को अलग-अलग नजरिये से देखना होगा। सबसे पहले उन क्षेत्रों को खोलना होगा, जहां सबसे ज्यादा जरूरी आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन होता है। जिन इलाकों में कोरोना का खतरा बढ़ रहा है, वहां स्क्रीनिंग, इलाज पर फोकस तथा जहां कम खतरा है, वहां आर्थिक गतिविधियों को कैसे बहाल करें, इसकी कार्ययोजना बनानी चाहिए।
4. लॉकडाउन में पाठ्यक्रम और पढ़ाई कैसे पूरी करवाई जा रही है, चूंकि सरकार ने शिक्षण संस्थानों को सबसे बाद में खोलने की बात कही है।
जवाब : हमारे संस्थान में इस वक्त पढ़ाई केन्द्र सरकार के आदेश पर बंद है। इस वक्त ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप होती है, नियमित कक्षाएं बंद रहती हैं, तो कोई खास फर्क नहीं पड़़ा है। अप्रेल-मई में अकादमिक गतिविधियां लगभग बंद होती हैं। मई-जून तक भी यह खिंचता है, तो हम आगे ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी कर रहे हैं। चूंकि आइआइएम एक प्रीमियर इंस्टीट्यूट है, लिहाजा पढ़ाई में गुणवत्ता से समझौता नहीं कर सकते।
5. महामारी के दौर में समाज के लिए उच्च शिक्षण संस्थान किस तरह से काम आ सकते हैं?
उत्तर : उच्च शिक्षण संस्थानों की कुछ निश्चित क्षेत्रों की विशेषज्ञताएं होती हैं। पढ़ाई, रिसर्च और नतीजों का क्रियान्वयन आदि को लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों के पास बेहतर गुणवत्ता होती है। लॉकडाउन खुलने के बाद हम सामान्य प्रशासन से बात करेंगे कि कुछ क्षेत्रों में होने वाले व्यवहारिक परिवर्तन को लेकर दीर्घावधि के काम करें। फिलहाल बात शॉर्ट टर्म के लेवल पर ही है।
'पाठ्यक्रम पूरा कर रहे हैं, परीक्षाएं भी सही वक्त पर कराएंगे' : प्रो. एस. सारंगदेवोत, कुलपति, राजस्थान विद्यापीठ डिम्ड टू बी यूनिवर्सिटी
1. यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में लॉकडाउन में पढ़ाई जारी रखने के लिए क्या प्रयास किए हैं?
जवाब : लॉकडाउन घोषित होते ही हमने ऑनलाइन क्लासेस शुरू कर दी थी। सभी संकायों के शिक्षकों ने पूरा टीचिंग प्लान बना लिया था। तकनीकी मदद से उन्होंने घर से ही शिक्षण सामग्री वेबसाइट पर अपलोड कर दी, जिनमें लिंक्स विद्यार्थियों को भेजे जा रहे हैं। हमारे यहां मेंटर सिस्टम है। एक शिक्षक के पास 20 बच्चे हैं। उन्हें तय समय में पढ़ाना होता है।
2. बाकी रह गई परीक्षाएं आयोजित कराने को लेकर क्या तैयारी है?
जवाब : लॉकडाउन अगर बढ़ाया गया, तो भी हम ऑनलाइन परीक्षाएं करवा लेंगे। सत्र के शिड्यूल के अनुसार 15 जुलाई तक नतीजे घोषित हो जाते हैं। इससे पहले जून तक सारी परीक्षाएं होती हैं। इसमें अब भी हमारे पास समय है। गर्मी की छुट्टियों का उपयोग कर सकते हैं। इस सत्र का पाठ्यक्रम हो चुका है। बच्चे उत्साह से ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। अच्छा रेस्पॉन्स आ रहा है। मई में उनकी काउंसलिंग करेंगे, ताकि परीक्षाओं के लिए मानसिक रूप से दक्ष बनें। उनके समय का नुकसान नहीं होने देंगे। परीक्षाएं तय समय से होंगी।
3. कैसे कर रहे हैं वर्कफ्रॉम होम? खाली वक्त का किस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है?
जवाब : पढ़ाई के अलावा शिक्षकों से आगामी सेमेस्टर्स का छह माह का टीचिंग प्लान मांगा गया है। अलग-अलग संकायों-विभागों का प्लान सत्र 2020-21 के लिए बनेगा। इसमें ही हर शिक्षक को प्रतिदिन छह घंटे अतिरिक्त काम करना होगा। स्मार्ट क्लासेस पर भी फोकस है। वैसे भारत में लॉकडाउन को सृजनात्मक रूप में लिया जा रहा है। लोग सेहत पर ध्यान दे रहे हैं, कुकिंग कर रहे हैं।
4. स्टूडेंट्स और यूनिवर्सिटी में संवाद कैसे हो रहा है? क्या माध्यम है?
जवाब : 90 प्रतिशत लोगों को ऑनलाइन जोड़ रखा है। यूजीसी के निर्देश हैं कि शिक्षकों में बांट रखा है। हर तीन माह में रिपोर्ट बनती है। विद्यार्थियों के आंकड़े हैं। उनका डेटाबेस बना हुआ है। इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले से हमारे पास था, जिससे काफी मदद मिली। सिर्फ पांच दिन में हमने तैयारी करने
5. महामारी के दौर में समाज के लिए उच्च शिक्षण संस्थान किस तरह से काम आए हैं?
जवाब : सबने एक दिन का वेतन दिया है। कुछ स्टॉफ ने एक, तीन और पांच दिन की सैलेरी भी दी है। संस्थान के अधीन आयुर्वेदिक-हौम्योपैथी अस्पतालों को आइसोलेशन सेंटर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। संस्थाना के कुछ एक्सटेंशन प्लान हैं, जो यूजीसी के आदेशों पर संचालित हैं। उनके जरिये लोगों की मदद कर रहे हैं। हमने मास्क बनवाकर बंटवाए। यूजीसी ने सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी के हिसाब से उच्च शिक्षा संस्थानों को जिम्मेदार बनाया है। सामुदाय आधारित गतिविधियों से जुड़कर काम किया जा रहा है।
Published on:
12 Apr 2020 09:19 am
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